ज़रा-हटके

यहां दुल्हन खुद गैर मर्दों से उतरवाती है अपने कपडे, वजह जानकर होंगे हैरान

ये दुनिया अजीब है। हर देश की अपनी एक परम्परा होती है। ऐसे में हर देश में शादी की भी अजीब-अजीब परम्परा होती है। आज हम चीन की शादी के दौरान की एक परम्परा के बारे में बताने जा रहे है जिसे जानने के बाद आप हैरान रह जाएंगे। चीन में किसी कपल की शादी के दौरान अगर दूल्हे के दोस्त, रिश्तेदार चाहे तो दुल्हन को छडे सकते है, उसे छू सकते है और उसके कपडे उतार सकते है। गैर मर्द उतारते है दुल्हन के कपडे: चीन में कुछ समय पहले हुई एक शादी की न्यूज़ काफी तेजी से वायरल हो रही है। उस शादी में दुल्हन ने सभी आए हुए मेहमानों से कहा कि वह उसे छेड़ सकते है और छू भी सकते है उसके कपडे उतार सकते है लेकिन एक शर्त पर, और वह शर्त यह थी कि इन सबके बदले में पैसे देंगे होंगे। हनीमून के लिए किया ये सब: लड़को के साथ ही वहां की लड़कियों ने भी इस बात को माना और उन्होंने भी दुल्हन के साथ छेड़खानी की। आप सभी को बता दें कि इस दुल्हन ने यह काम इस वजह से किया कि उसके पति के पास पैसे नहीं थे और वह हनीमून पर जाना चाहती थी। वैसे तो यह वहां की परम्परा भी है जिसे दुल्हन को निभाना ही पड़ता है।

ये दुनिया अजीब है। हर देश की अपनी एक परम्परा होती है। ऐसे में हर देश में शादी की भी अजीब-अजीब परम्परा होती है। आज हम चीन की शादी के दौरान की एक परम्परा के बारे में बताने जा रहे …

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आपके पार्टनर को आप में कितना इंटरेस्ट है, कितने दिन टिकेगा रिश्ता ??

हर कोई भी रिश्ता प्यार और विश्वास पर टिका होता है। अगर किसी रिश्ते में एक तरफ से प्यार कम हो जाए तो रिश्ता टूटने की कगार पर आ जाता है। कई बार आपको ऐसा लगता है कि आपका पार्टनर …

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इस शहर में रात में किसी के भी घर आ जाती हैं ये जवान महिला फिर करती हैं घर में घुस कर कुछ ऐसा हिल जायंगे आप

आज हम आपको एक बेहद शातिर महिला के बारे में बताने जा रहे हैं इस महिला ने कई हंसते खेलते घरों को उजाड़ दिया बर्बाद कर के रख दिया है ! कहीं अगला शिकार आप ना बन जायें ? इसलिए …

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5 रुपये का ये वाला नोट तो हो सकते हैं मालामाल 15 दिन में जमा करे और हो जाये लखपति

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपको ₹5 के एक ऐसे नोट के बारे में बताने वाले हैं। जो काफी दुर्लभ है। और यह नोट आप लोगों को लखपति बना सकता है। आखिर इस नोट में ऐसी क्या खास …

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मंडप में दुल्हन ने करवाया कुछ ऐसा नहीं कर पाएंगे आप भी

अब तक आपने दुल्हन के शादी से इंकार करने पर बारात लौटने की खबरें पढ़ी, सुनी और देखी होंगी। लेकिन एक दुल्हन ही मंडप छोड़कर वापस लौट जाए, एेसा मामला पहली बार सामने आया है। दुल्हन को अपने होने वाले डाक्टर पति की मंडप के नीचे कही गई एक बात इतनी बुरी लगी कि वह वहां से उठकर चली गई। फिर मनाने-समझाने का दौर शुरू हुआ लेकिन वह राजी नहीं हुई। मामला थाने और एसपी तक पहुंचा फिर भी बात नहीं बनी और दुल्हन अपने घरातियों को लेकर विवाह स्थल से रवाना हो गई। एक-दूसरे से करते थे प्यार मनोज और युवती के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसके बावजूद उसके अचानक सात फेरे लेने से इंकार करने पर रिश्तेदार दंग रह गए। क्योंकि युवती की ही पसंद होने के कारण राज से उसके परिजन शादी करने के लिए तैयार हुए थे। वे खंडवा से बैतूल बेटी की शादी करने ही आए थे। क्या हुआ था सारनी नगर के पाटाखेड़ा में 28 मई 2018 रविवार रात को मनोज और उसकी प्रेमिका के फेरे होने वाले थे। खुशियों का माहौल था। लेकिन दूल्हा मनोज एेसी हरकत कर गया कि खुशियों का माहौल परेशानी और चिंता में बदल गया। दुल्हन ने सात फेरे लेने से इनकार कर दिया। रिश्तेदारों के पूछने पर युवती ने बताया कि मेरा होने वाले जीवन साथी की हरकत देखने के बाद अब मैं उससे शादी नहीं कर सकती हूं। क्योंकि उसने शनिवार रात गीत, संगीत का कार्यक्रम चल रहा था मनोज ने शराब के नशे में झगड़ा कर लिया. परिजनों से विवाद किया और अपशब्द भी कहे। मैं एेसे शख्स के साथ अपनी जिंदगी नहीं गुजार सकती हूं। इसके बाद वह बिना विवाह किए अपने परिवार के साथ खंडवा वापस लौट गई। बताया जाता है कि घर वापस लौटते समय युवती ने सारनी थाना प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान को लिखित आवेदन भी दिया है जिसमें अपनी सहमति से रिश्ता तोडऩे की बात कही है। इसके बाद मामला चर्चा का विषय बना। इस संबंंध में सारणी थाना प्रभारी एमएस चौहान ने बताया कि दोनों परिवार ने आपसी सहमति से रिश्ता तोड़ा है।

अब तक आपने दुल्हन के शादी से इंकार करने पर बारात लौटने की खबरें पढ़ी, सुनी और देखी होंगी। लेकिन एक दुल्हन ही मंडप छोड़कर वापस लौट जाए, एेसा मामला पहली बार सामने आया है। दुल्हन को अपने होने वाले …

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इस स्टेशन के बाहर मिलती हैं सिर्फ 75 रुपये में मनचाही लडकिय 200 वाला पैकेज हिला देगा आपको

देश में कई जगह महिलाएं देंह व्यापार का धंधा कर रही हें तो पुरुष अपनी सेक्स की भूख मिटा रहा और अपना शौक भी पूरा कर रहा है ! यह मामला उत्तर प्रदेश के जिला बस्ती का है ! बस्ती …

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ऐसे पुरुषों को ज्यादा पसंद करती हैं महिलाएं करवा लेती हैं ये चीज़

शायद आप नहीं जानते कि आपकी जिंदगी में बॉडी लैंग्वेज कितना महत्वपूर्ण किरदार निभाता है. आपके शब्द आपकी बात कहने के लिए जितने जरूरी होते हैं उससे कहीं ज्यादा काम आपकी बॉडी लैंग्वेज करती है. हर लड़की अपने होने वाले …

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दुनिया में सबसे कीमती क्या है, इस कहानी में मिलेगा जवाब चाहिए तो पढ़े रोचक खबर

दुनिया में सबसे कीमती चीज क्या है? इस सवाल का जवाब हर व्यक्ति अपने हिसाब से देता है। किसी के लिए धन-दौलत जरूरी है, तो किसी के लिए दूसरी भौतिक वस्तुएं। बहरहाल, यह हम एक कहानी बताएंगे, जिसे पढ़कर इस सवाल का सही-सही जवाब मिल जाएगा। एक राजा समय-समय पर प्रतियोगिताएं आयोजित करवाता था और विजेताओं को सम्मान तथा ईनाम देता था। राज्य के लोग इन प्रतियोगिताओं में खुलकर हिस्सा लेते थे। इससे उनमें हमेशा उत्साह बना रहता था। एक बार राजा ने राजपुरुष के चयन की प्रतियोगिता रखी। उसने एक वाटिका बनवाई जिसमें हर तरह की वस्तुएं रखी गईं लेकिन उन पर उनका मूल्य नहीं लिखा था। राजा ने ऐलान किया कि जो व्यक्ति इनमें से सबसे कीमती वस्तु लेकर वाटिका से बाहर आएगा, उसे इस साल का राजपुरुष घोषित किया जाएगा। लोग वाटिका में जाते और अपनी समझ से सबसे मूल्यवान वस्तु उठा लाते। कोई हीरे-जवाहरात लाया तो कोई पुस्तक उठाकर लाया, क्योंकि उसके लिए ज्ञान अधिक मूल्यवान था। एक गरीब रोटी उठाकर लाया क्योंकि उसकी नजर में रोटी ही मूल्यवान थी। एक भक्त ईश्वर की मूर्ति उठाकर लाया। तभी एक योगी आया। वाटिका में काफी देर घूमने के बाद वह खाली हाथ बाहर निकला। राजा ने सभी व्यक्तियों द्वारा लाई गई वस्तुओं को देखा। जब योगी की बारी आई तो राजा ने पूछा, तुम क्या लाए हो? उसने कहा, 'मैं संतोष लाया हूं, महाराज।' राजा ने पूछा- 'तुम्हारा संतोष क्या सबसे मूल्यवान है'? योगी ने जवाब दिया- 'हां महाराज, इस वाटिका में आपने जितनी भी वस्तुएं रखी हैं, उन्हें प्राप्त कर मनुष्य को खुशी तो होगी, पर वह क्षणिक होगी। इसे हासिल कर लेने के बाद फिर कुछ और पाने के लिए मन बेचैन हो उठेगा। लेकिन जिसका पास सच्चा संतोष है, वह सभी इच्छाओं से ऊपर होगा और सुखी रहेगा।' राजा ने उस योगी को ही राजपुरुष घोषित किया।

दुनिया में सबसे कीमती चीज क्या है? इस सवाल का जवाब हर व्यक्ति अपने हिसाब से देता है। किसी के लिए धन-दौलत जरूरी है, तो किसी के लिए दूसरी भौतिक वस्तुएं। बहरहाल, यह हम एक कहानी बताएंगे, जिसे पढ़कर इस …

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शनिवार को नजर आए ये तीन, तो समझिए कुछ अच्छा होने वाला है कमाल का

बहुत से लोग इस बात का खास ध्यान रखते हैं कि किसी अच्छे काम या घर से ऑफिस के लिए निकलते ही उनका सामने किससे हुआ? कोई गाय को शुभ मानता है तो कोई कहता है कि किसी महिला का बर्तन में पानी लिए सामने आना अच्छा होता है। शनिवार को लेकर भी ऐसी कुछ मान्यताएं हैं। आमतौर पर लोग शनि देव से खौफ खाते हैं, लेकिन यहां हम बताएंंगे कि शनिवार के दिन यदि आप घर से निकल रहे हैं और आपका सामना नीचे बताए गए लोगों या पशु से होता है तो समझिए वह दिन आपके लिए लकी है और आपके सारे काम पूरे होने वाले हैं - शनिदेव को काला कुत्ता पसंद है। यदि घर के बाहर निकलते ही आपका सामना किसी काले कुत्ते से हुआ है तो आपको मन ही मन प्रसन्न होना चाहिए। धर्म ग्रंथों में लिखा है कि शनिवार को काले कुत्ते के रोटी खिलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। वहीं कुछ लोग सफाई करती हुई महिला का सामने आना भी अच्छा मानते हैं। कोई पुरुष सफाईकर्मी भी झाड़ू लगाता हुआ बाहर मिल जाए तो उसे कुछ न कुछ दान जरूर दें। आपका काम बनेगा। यूं तो आम जीवन में लोग भिखारियों के कतराते हैं, लेकिन शनिवार को आप कहीं जा रहे हैं और कोई भिखारी नजर आ जाए, तो मान लिए यह शुभ संकेत है। ऐसे किसी भिखारी या निर्धन को दान देकर आगे बढ़ जाए, जानकार करते हैं कि आप पर शनिदेव की कृपा बनी रहेगी। शनिदेव को तेल चढ़ाने के दौरान रखें इन बातों का ध्यान लोहे के बर्तन से चढ़ाएं तेल - अक्सर शनि मंदिरों के बाहर प्लास्टिक की बोतलों में या स्टील की कटोरी में तेल मिलता है। लोग इसे वैसे ही ले जाकर चढ़ा देते हैं। इससे पूरा लाभ नहीं मिलता है। सबसे अच्छा तरीका यह है कि लोह के बर्तन में तेल को डाला जाए, फिर उसे शनि प्रतिमा पर चढ़ाया जाए। तेल में चेहरा देखें - शनिदेव को तेल चढ़ाते वक्त सबसे महत्वपूर्ण बात कि तेल चढ़ाने से पहले तेल में अपना चेहरा देखें। ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और जातक पर चल रहे संकट और दोषों को दूर करते हैं। सफाई का रखें ध्यान - यदि आप घर से तेल लेकर जा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि वह साफ और स्वच्छ हो। उसे गंदे हाथों से नहीं छुआ गया हो और घर का खाना बनाने के दौरान उसका इस्तेमाल नहीं किया गया हो।

बहुत से लोग इस बात का खास ध्यान रखते हैं कि किसी अच्छे काम या घर से ऑफिस के लिए निकलते ही उनका सामने किससे हुआ? कोई गाय को शुभ मानता है तो कोई कहता है कि किसी महिला का …

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इस्लाम के दूसरे पैगंबर हजरत शीश की मजार हैं अयोध्या में

ईद के मौके पर इस्लामिक आस्था फलक पर है और इसी के साथ रामनगरी अयोध्या से इस्लाम का जुड़ाव परिभाषित हो रहा है। यह जुड़ाव सातवीं शताब्दी में हजरत मुहम्मद के दौरे के बहुत पहले का है। इस्लामिक परंपरा में प्रथम पैगंबर के रूप में हजरत आदम की प्रतिष्ठा है, जिसे सनातन परंपरा मनु के नाम से जानती है। इन्हीं हजरत आदम की औलादों में हजरत शीश दिव्य गुणों से युक्त थे और उन्हें दूसरे पैगंबर का गौरव हासिल है। रामनगरी के पौराणिक स्थल मणिपर्वत के पृष्ठ में हजरत शीश की मजार स्थित है। हजरत शीश की दरगाह के गद्दीनशीन मौलाना आसिफ के अनुसार, यहां हिदू-मुस्लिम समान रूप से मन्नत मांगने आते हैं। आध्यात्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्र उर्फ जय सिह चौहान के अनुसार इस्लामिक परंपरा वस्तुतः अनादि सनातनी धारा का ही परिष्कृत संस्करण है और इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद से पूर्व अयोध्या से जुड़ती इस्लामिक परंपरा इस सच्चाई की पुष्टि करती है। सनातनी धार और इस्लाम से रिश्तों की सुगंध अयोध्या कोतवाली के पीछे नौगजी मजार पर भी महसूस की जा सकती है। नौगजी की मजार हजरत नूह के पौत्र से समीकृत की जाती है, इस्लामिक परंपरा जिन्हें हिदुस्तान का निर्माता मानती है। इसी विरासत के अनुरूप मध्यकाल में सूफी संतों की पूरी पांत-पीढ़ी रामनगरी की ओर उन्मुख नजर आती है। ऐसे ही सूफी फकीरों में हजरत इब्राहिम शाह का जिक्र अहम है। उनकी स्मृति स्वर्गद्वार स्थित हजरत इब्राहिम शाह की दरगाह से प्रवाहमान है। मान्यता है कि हजरत की दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। यदि सच्चे दिल से पुकार उठती है तो दुआ भी मिलनी तय मानी जाती है। ऐतिहासिक विवरण के अनुसार हजरत ताशकंद के शाहजादे थे पर किशोरावस्था से ही वह दुनियादारी से इतर दुनिया के मालिक से मुहब्बत की ओर उन्मुख हुए और राजकीय वैभव-विलास को तिलांजलि दे लंबी यात्रा करते हुए अयोध्या आ पहुंचे। मुस्लिम लीग के प्रांतीय अध्यक्ष और सूफी संतों के मुरीद डॉ. नजमुल हसन गनी के अनुसार हजरत का अयोध्या आना महज संयोग नहीं था। हकीकत तो यह है कि अयोध्या की जमीन बहुत हसीन और पाक है, यहां कदम नहीं पलक के बल चलना चाहिए और इस रूहानी सच्चाई से ही प्रेरित हो हजरत इब्राहिम ने पवित्र नदी सरयू के तट पर स्थित उस स्थान पर धूनी रमाई होगी, जिसे सदियों से अड़गड़ा नाम से जाना जाता है। इब्राहिम शाह की गणना शेख मोइनुद्दीन चिश्ती, निजामुद्दीन औलिया, किछौछा में आराम फरमा हजरत जहांगीर समनानी जैसे शीर्षस्थ सूफी संतों में होती रही है।

ईद के मौके पर इस्लामिक आस्था फलक पर है और इसी के साथ रामनगरी अयोध्या से इस्लाम का जुड़ाव परिभाषित हो रहा है। यह जुड़ाव सातवीं शताब्दी में हजरत मुहम्मद के दौरे के बहुत पहले का है। इस्लामिक परंपरा में …

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