राज्य

IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू एंड फैमिली की कोर्ट में होगी पेशी

आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य शनिवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होंगे. दरअसल, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने लालू एंड फेमली के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. …

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आयुष्मान योजना की सूची में परिवार के साथ कांग्रेस और भाजपा के नेता भी शामिल

गरीब व जरूरतमंदों के इलाज के लिए शुरू आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की सूची में सत्ताधारी भाजपा के महामंत्री और पूर्व विधायक के परिवार का नाम है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं उनके परिवार का भी नाम सूची में शामिल है। दोनों ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया है। सख्त कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने की बात कही है। वर्ष 2011 की बीपीएल सूची के आधार पर केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों का चयन किया है। इसके तहत गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा निश्शुल्क मुहैया होगी। इस योजना का लाभ पाने के लिए गरीब सरकारी अस्पताल से लेकर नर्सिंग होम के चक्कर लगा रहे हैं। सूची में नाम न होने पर लौटाए भी जा रहे हैं। वहीं, कैबिनेट मंत्री, सांसद के भाई, पूर्व विधायक और आइआइटी के प्रोफेसर का भी इस योजना में नाम है। बुधवार को वाट्सएप पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और पूर्व विधायक सलिल विश्नोई एवं उनके पूरे परिवार तथा कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय कपूर व उनके परिवार, उनके भाई और कोआपरेटिव इंडस्ट्रियल एस्टेट के चेयरमैन विजय कूपर और छोटे भाई एवं कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन संजय कपूर के दर्ज नाम वाली आयुष्मान भारत के लाभार्थी की सूची वायरल हुई। इसमें स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट से अपलोड की गई डिटेल थी। इसकी जानकारी दोनों पूर्व विधायकों को दी गई तो उन्होंने इसे अधिकारियों तथा कर्मचारियों की लापरवाही करार दिया है। यह भी पढ़ें : औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना को परिवार समेत बना दिया आयुष्मान योजना का लाभार्थी गंभीरता से होनी चाहिए जांच कई विधायकों एवं पूर्व विधायकों के नाम डाले गए हैं। यह बड़ी लापरवाही है। इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखेंगे। -अजय कपूर, पूर्व विधायक जिलाधिकारी को लिखेंगे पत्र मैं 40 साल से आयकरदाता हूं। आयुष्मान भारत की लाभार्थी सूची में नाम शामिल करना सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों की लापरवाही है। इसकी गंभीरता से जांच के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखेंगे। ताकि जरूरतमंदों को लाभ मिल सके। -सलिल विश्नोई, पूर्व विधायक बीपीएल सूची के आधार पर हुआ चयन वर्ष 2011 की बीपीएल सूची के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया गया है। सत्यापन के समय कई घरों में टीम को घुसने नहीं दिया गया और न ही सूचना उपलब्ध कराई। इससे पहले ही शासन और प्रशासन को अवगत करा चुके हैं।गरीब व जरूरतमंदों के इलाज के लिए शुरू आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की सूची में सत्ताधारी भाजपा के महामंत्री और पूर्व विधायक के परिवार का नाम है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं उनके परिवार का भी नाम सूची में शामिल है। दोनों ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया है। सख्त कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने की बात कही है। वर्ष 2011 की बीपीएल सूची के आधार पर केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों का चयन किया है। इसके तहत गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधा निश्शुल्क मुहैया होगी। इस योजना का लाभ पाने के लिए गरीब सरकारी अस्पताल से लेकर नर्सिंग होम के चक्कर लगा रहे हैं। सूची में नाम न होने पर लौटाए भी जा रहे हैं। वहीं, कैबिनेट मंत्री, सांसद के भाई, पूर्व विधायक और आइआइटी के प्रोफेसर का भी इस योजना में नाम है। बुधवार को वाट्सएप पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री और पूर्व विधायक सलिल विश्नोई एवं उनके पूरे परिवार तथा कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय कपूर व उनके परिवार, उनके भाई और कोआपरेटिव इंडस्ट्रियल एस्टेट के चेयरमैन विजय कूपर और छोटे भाई एवं कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन संजय कपूर के दर्ज नाम वाली आयुष्मान भारत के लाभार्थी की सूची वायरल हुई। इसमें स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट से अपलोड की गई डिटेल थी। इसकी जानकारी दोनों पूर्व विधायकों को दी गई तो उन्होंने इसे अधिकारियों तथा कर्मचारियों की लापरवाही करार दिया है। यह भी पढ़ें : औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना को परिवार समेत बना दिया आयुष्मान योजना का लाभार्थी गंभीरता से होनी चाहिए जांच कई विधायकों एवं पूर्व विधायकों के नाम डाले गए हैं। यह बड़ी लापरवाही है। इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखेंगे। -अजय कपूर, पूर्व विधायक जिलाधिकारी को लिखेंगे पत्र मैं 40 साल से आयकरदाता हूं। आयुष्मान भारत की लाभार्थी सूची में नाम शामिल करना सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों की लापरवाही है। इसकी गंभीरता से जांच के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखेंगे। ताकि जरूरतमंदों को लाभ मिल सके। -सलिल विश्नोई, पूर्व विधायक बीपीएल सूची के आधार पर हुआ चयन वर्ष 2011 की बीपीएल सूची के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया गया है। सत्यापन के समय कई घरों में टीम को घुसने नहीं दिया गया और न ही सूचना उपलब्ध कराई। इससे पहले ही शासन और प्रशासन को अवगत करा चुके हैं।

गरीब व जरूरतमंदों के इलाज के लिए शुरू आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की सूची में सत्ताधारी भाजपा के महामंत्री और पूर्व विधायक के परिवार का नाम है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं उनके परिवार का भी नाम सूची …

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भाजपा अनुसूचित मोर्चा के कार्यकर्ताओं को और सक्रिय होना पड़ेगा

भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में भाजपा अनुसूचित मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की जमघट प्रतापगढ़ में हुई। इस दौरान केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रमों को गांवों में प्रसारित करने का आह्वान किया गया। मुख्य अतिथि अनुसूचित आयोग की …

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India International Science Festival-2018 : कल से लखनऊ में देखिये विज्ञान के रहस्य

देश ने विज्ञान के क्षेत्र में कितनी तरक्की की है, इसकी झलक अब आप भी देख सकेंगे। राजधानी में पांच अक्टूबर से चार दिवसीय भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आइआइएसएफ) 2018 के अंतर्गत मेगा साइंस, टेक्नोलॉजी एवं इंडस्ट्री एक्सपो का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया जा रहा है। एक्सपो का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन पांच अक्टूबर को सुबह दस बजे करेंगे। एक्सपो में भारत सरकार के सभी वैज्ञानिक संस्थान अपनी-अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों को जनता के सामने प्रदर्शित करेंगे। एक्सपो का मुख्य आकर्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), परमाणु ऊर्जा विभाग, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएसआर) आदि द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी होंगी। डीआरडीओ द्वारा विकसित ब्रह्मोस, पिनाक मिसाइल, वारफेयर टैंक एवं इसरो द्वारा विकसित गगनयान, चंद्रयान, पीएसएलवी प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण होंगे। जीवित महिला को मृत बताकर हड़पी लाखों की रकम, फर्जी वसीयत बनाकर किया खेल यह भी पढ़ें एक्सपो प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम सात बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा। इसे निश्शुल्क देखा जा सकेगा। आयोजन के संयोजक सचिव श्रेयांश मंडलोई कहते हैं कि एक्सपो हर एक के लिए आकर्षण का केंद्र होगी। इसलिए बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोगों को इसे जरूर देखना चाहिए। सना खान ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया अपना बयान, कहा-पुलिस पर भरोसा यह भी पढ़ें महिलाओं व बच्चों को समर्पित होगा हेल्थ कॉन्क्लेव महिलाएं और बच्चे स्वास्थ्य के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। कुपोषण, विटामिन, आयरन की कमी, स्वच्छता सुविधाओं की कमी और दूषित पेयजल सेहत खराब कर रहा है। वहीं जादू टोना, काला जादू और आधुनिक चिकित्सा के प्रति गलत अवधारणाएं भी बड़ी बाधा हैं। के तहत साइंटिफिक कंवेंशन सेंटर में पांच अक्टूबर से हेल्थ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाम छह बजे करेंगे। प्रदर्शनी में विशिष्ट स्वास्थ्य जांच, स्वास्थ्य चर्चा और महिला एवं शिशु से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। 25 अक्टूबर तक चलने वाली प्रदर्शनी आमजन के लिए हर रोज सुबह 10 बजे से शाम सात बजे तक खुली रहेगी।

देश ने विज्ञान के क्षेत्र में कितनी तरक्की की है, इसकी झलक अब आप भी देख सकेंगे। राजधानी में पांच अक्टूबर से चार दिवसीय भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आइआइएसएफ) 2018 के अंतर्गत मेगा साइंस, टेक्नोलॉजी एवं इंडस्ट्री एक्सपो का आयोजन …

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वनमंत्री बोले, गिर के जंगल में शेरों की मौत के लिए केनाइन डिस्टेम्पर वायरस जिम्मेदार

सासन गिर के जंगल में पांच एशियाई शेरों की हालत गंभीर है। वनमंत्री गणपत सिंह वसावा ने शेरों की मौत के लिए एक वायरस को जिम्मेदार बताया है। शेरों में केनाइन डिस्टेम्पर नामक वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। सरकार ने अमेरिका से खास वैक्सीन मंगा ली है। सासन गिर के दलखानिया रेंज में 12 सितंबर से अब तक 23 शेरों की मौत हो चुकी है। करीब 25 वर्ग किलोमीटर में इन शेरों की मौत हुई, जहां प्रोटोजोआ का संक्रमण होना पाया गया है। एक दर्जन शेरों की मौत होने तक वन विभाग इसकी वजह वर्चस्व के लिए आपसी लड़ाई बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता रहा। इस बीच, अन्य शेर भी संक्रमण के शिकार हो गए। जसाधार एनिमल हेल्थ केयर सेंटर में उपचार के लिए रखे गए पांच शेरों में से दो ने बीती रात दम तोड़ दिया। इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से 31 शेरों को जामवाला एनिमल हेल्थ केयर सेंटर में रखा गया है। बताया जा रहा है कि उपचार के लिए लाए गए शेरों में पांच की हालत गंभीर है। वनमंत्री गणपतसिंह वसावा ने कहा है कि शेरों की मौत के लिए वायरस जिम्मेदार है। संक्रमण के कई कारण जिम्मेदार होते हैं, लेकिन वनविभाग की कोई लापरवाही इस मामले में सामने नहीं आई है। सासन गिर में करीब 600 शेर हैं। शेरों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण इनके विस्तार में सतत कमी हो रही है। इसके चलते जंगल के आसपास बसे गांवों तक शेरों के जाने व पालतू जानवरों को मारने की घटनाएं भी सामने आती हैं। शुरू में शेरों की मौत पर पर्दा डालने के लिए पशुमालिकों की ओर से जहर दिए जाने की आशंका भी जताई गई, लेकिन लगातार शेरों की मौत के चलते इसे छिपाया नहीं जा सका। वनमंत्री ने बताया है कि कुछ सैंपिल राज्य के बाहर की लेबोरेटरी में भी भेजे गए हैं। उधर, गुजरात हाईकोर्ट ने शेरों की मौत के लिए गैरकानूनी तरीके से जंगल में लायन शो होने को भी संक्रमण वजह माना है। कुछ माह पहले ही जंगल में शेरों को मुर्गी दिखाकर ललचाते एक वीडियो वायरल हुआ था। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट देवसी बारड बताते हैं कि केनाइन डिस्टेम्पर के कारण अफ्रीका व तंजानिया में बड़ी संख्या में शेर मरने की घटना हो चुकी है। सासन गिर में इसका संक्रमण पहली बार पाया गया है। मूल रूप से यह वायरस कुत्तों में पाया जाता है। सरकार लंबे समय से गिर जंगल से कुत्तों को हटाने का कार्यक्रम भी चला रही है, लेकिन जंगल में बसे गांवों की वजह से यह पूरी तरह नहीं हो पाया। यहां करीब दो दर्जन गांवों में गैरकानूनी लायन शो होता है। आशंका यही है कि कुत्ते की लार लगे मांस के भक्षण या कुत्तों के संपर्क में आने से शेरों में यह वायरस चला गया है।

सासन गिर के जंगल में पांच एशियाई शेरों की हालत गंभीर है। वनमंत्री गणपत सिंह वसावा ने शेरों की मौत के लिए एक वायरस को जिम्मेदार बताया है। शेरों में केनाइन डिस्टेम्पर नामक वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। …

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महालक्ष्मी मंदिर ने नवरात्रि में श्रद्धालुओं के लिए जारी किया ड्रेस कोड

पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति ने श्रद्धालुओं से नवरात्रि के मौके पर तंग कपड़े पहनकर नहीं आने का अनुरोध किया है। यह अपील पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर के लिए जारी की गई है। महाराष्ट्र देवस्थान समिति पश्चिमी महाराष्ट्र के 3000 से ज्यादा मंदिरों के मामले की देखभाल करती है। समिति की अपील ने महिला अधिकार कार्यकर्ता तृप्ति देसाई को यह चेतावनी जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया है कि लादा गया ड्रेस कोड फतवा जैसा होगा और उसके खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। सरकार द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष महेश जाधव ने कहा है कि कोई ड्रेस कोड लादा नहीं गया है। यह केवल श्रद्धालुओं से तंग कपड़े नहीं पहनने की अपील की गई है। जाधव ने कोल्हापुर से फोन पर हुई बातचीत में कहा, 'देश भर से हमें हजारों पत्र और ई-मेल मिले हैं। इसमें सुझाव दिया गया है कि मंदिर की पवित्रता को (उचित परिधान के माध्यम से) बनाए रखा जाए। समिति की दो महिला सदस्य भी इससे सहमत हैं। इसलिए हमने दो दिन पहले महालक्ष्मी मंदिर में आने वाले लोगों से उचित परिधान में आने की अपील करने का प्रस्ताव पारित किया है।' उन्होंने कहा कि यदि कोई तंग कपड़े में आएगा या आएगी तो उसे प्रतिमा के दर्शन करने से नहीं रोका जाएगा। हम उन्हें उचित परिधान बदलने के लिए कक्ष भी मुहैया कराने के लिए तैयार हैं। अहमदनगर जिले में शनी शिंग्नापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की मांग करते हुए आंदोलन करने वाली तृप्ति देसाई ने कहा कि वह और उनकी समर्थक महालक्ष्मी मंदिर में ड्रेस कोड लादे जाने का विरोध करेंगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं से पूरी तरह खुद को ढंक कर आने को कहना या महिलाओं के लिए साड़ी को अनिवार्य करना फतवा के जैसा होगा। यह असंवैधानिक होगा और सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ होगा।

पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति ने श्रद्धालुओं से नवरात्रि के मौके पर तंग कपड़े पहनकर नहीं आने का अनुरोध किया है। यह अपील पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर के लिए जारी की गई है। महाराष्ट्र देवस्थान समिति पश्चिमी …

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प्रधानमंत्री मोदी की एक अपील ने इस क्षेत्र में तोड़ डाले सारे पुराने रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने राष्ट्रीय राजधानी में खादी उत्पादों की बिक्री ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। अकेले कनॉट प्लेस के स्टोर से बिक्री का मामला एक करोड़ से ऊपर पहुंच गया। यह रिकार्ड बिक्री दो अक्टूबर को हुई है। इसके दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात रेडियो कार्यक्रम में लोगों से खादी के उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की थी। एक अधिकारी ने बताया कि पूरी दिल्ली में खादी के स्टोर से गांधी जयंती के दिन दो अक्टूबर को बिक्री में 50 फीसद तक का इजाफा हुआ। कनॉट प्लेस के स्टोर में रिकार्ड तोड़ बिक्री हुई। बिक्री का आंकड़ा 1.06 करोड़ पर पहुंच गया। यह प्रधानमंत्री की अपील का असर है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में बिक्री का आंकड़ा 70.01 था। ADVERTISING inRead invented by Teads एक वर्ष में 2 अक्टूबर के दिन की बिक्री में करीब 36 लाख रुपये का इजाफा देखने को मिला, जो 51 फीसद का उछाल लिए हुए है। उस दिन कुल 13, 657 लोग स्टोर में आए, जबकि 2,730 बिक्री रसीद बनी। अधिकारी ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना दो अक्टूबर को खुद उपस्थित होकर ग्राहकों को संभाल रहे थे। दुष्कर्म की सनसनीखेज घटना, युवती ने दूसरी युवती को बनाया 'हवस' का शिकार यह भी पढ़ें यहां पर याद दिला दें कि केंद्र सरकार खादी को विशुद्ध 'भारतीय ब्रांड' के रूप में स्थापित करने और विदेशी बाजारों तक इसकी पहुंच को मजबूती देने की योजना बना रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग (एमएसएमई) के सचिव अरुण कुमार पांडा के मुताबिक, सरकार खादी को ऐसे भारतीय ब्रांड के रूप में स्थापित करने की सोच रही है, जिसकी बिक्री या प्रमोशन का हक सिर्फ खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआइसी) को है। इसके साथ ही सरकार विदेशी प्रदर्शनियों और अन्य आयोजनों में खादी की पैठ बढ़ाने की तैयारियों में भी जुट गई है। असल में कई विदेशी कंपनियां स्थानीय बाजारों में खादी को अपने ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत कराने की कोशिशों में लगी हैं। जर्मनी की एक कंपनी खादी नेचरप्रोडक्टे जीबीआर ने यूरोपीय यूनियन में ट्रेडमार्क और डिजाइन पंजीकरण के लिए नोडल एजेंसी ओएचआइएम से खादी को अपने ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत कराया था। सरकार का नया कदम ऐसी कंपनियों के मंसूबों को नाकाम करना और खादी को विदेशी बाजार में प्रतिष्ठित भारतीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने राष्ट्रीय राजधानी में खादी उत्पादों की बिक्री ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। अकेले कनॉट प्लेस के स्टोर से बिक्री का मामला एक करोड़ से ऊपर पहुंच गया। यह रिकार्ड बिक्री दो अक्टूबर …

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2 अक्टूबर की आधी रात का पूरा सच, इस समझौते से टला टकराव

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले ट्रैक्टर-ट्रॉली, टाटा-407 समेत अन्य वाहनों से लैस किसानों का आधी रात को हुआ समझौता कई सवाल पैदा कर रहा है। इस आंदोलन से किसानों को क्या मिला? यह भी समझ से परे है। लेकिन सबसे बड़ा राज तो यह है कि आखिर 2 अक्टूबर की रात को ऐसा क्या हुआ कि पुलिस-किसान दोनों 'दोस्त' बन गए और किसानों को दिल्ली में दाखिल होने की इजाजत मिल गई। अब धीरे-धीरे इस समझौते की परतें खुल रही हैं। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से आए हजारों किसानों की मांग सुनने के लिए कोई नेता आगे नहीं आ रहा था। हालांकि, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेताओं से जरूर बात की, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद किसान नेताओं के सामने किसान क्रांति पदयात्रा की सार्थकता का सवाल पैदा हो गया। सवाल यह भी था किसान क्रांति पदयात्रा दिल्ली के राजघाट तक नहीं पहुंची तो वे अपने समर्थकों को क्या मुंह दिखाएंगे, क्योंकि किसान नेताओं ने पदयात्रा राजघाट पर जाकर समाप्त करने का एलान किया था। दुष्कर्म की सनसनीखेज घटना, युवती ने दूसरी युवती को बनाया 'हवस' का शिकार यह भी पढ़ें सूत्रों के मुताबिक, 2 अक्टूबर को किसान सुबह से लेकर शाम तक पुलिस से भिड़ते रहे। इस दौरान हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया, जिसमें 40 किसान और दर्जन भर पुलिसवाले घायल हुए। लेकिन जैसे-जैसे शाम से रात हुई और रात बीतने लगी किसान नेताओं की बेचैनी भी बढ़ी। इस दौरान किसान नेताओं को यह अहसास हो चला था कि पुलिस बल उन्हें दिल्ली में नहीं घुसने देगा। इस तरह हुआ किसान-पुलिस में समझौता सूत्रों के मुताबिक, पुलिस के आला अधिकारी और किसान नेता दोनों ही चाह रहे थे कि मामला जल्द खत्म हो। ऐसे में एक फॉर्मूला पेश किया गया। इस फॉर्मूले के तहत यह तय हुआ कि किसान आधी रात को किसान घाट जाएंगे और 3 अक्टूबर को सुबह उजाला होने से पहले दिल्ली से यूपी लौट जाएंगे। इस पर किसान नेता और पुलिस दोनों राजी थे, लेकिन किसान अपने ट्रैक्टर ले जाने पर अड़ गए। इस पर पुलिस ने शर्त रखी कि रात को ट्रैफिक नहीं होता इसलिए ट्रैक्टर के साथ किसान जाएं, लेकिन रात में ही इन्हें लौटना होगा। दोनों पक्षों में हुए समझौते के तहत ऐसा ही हुआ। समझौते का हुआ पालन डीजल गाड़ियों पर प्रतिबंध से ट्रैक्टर को छूट, दिल्ली समेत 4 राज्य के लाखों किसानों को राहत यह भी पढ़ें पुलिस और किसान नेताओं के बीच हुए समझौते के तहत किसानों ने एक से दो बजे के बीच दिल्ली में प्रवेश करना शुरू किया। दो बजे किसान नेता राजघाट होते हुए किसान घाट पहुंचे। समझौते के तहत चार बजे तक किसानों ने यूपी वापस लौटना शुरू किया। पुलिस ने दिखाई समझदारी, दिल्ली में नहीं प्रवेश करने दिया किसानों को गुजरात के व्यापारियों से 4.5 करोड़ लूट में सनसनीखेज खुलासा, डॉन दाऊद से जुड़े तार यह भी पढ़ें पुलिस की मानें तो अगर किसानों को मंगलवार सुबह राजधानी में प्रवेश करने देने से दिल्ली की कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। पांच हजार से अधिक किसान दिल्ली में प्रवेश करना चाह रहे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने देर रात तक उन्हें उत्तर प्रदेश-दिल्ली की सीमा पर रोके रखा। किसानों की ओर से हिंसक प्रदर्शन करने पर भी पुलिस ने आपा नहीं खोया। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकना बड़ी चुनौती थी। स्पेशल ब्रांच से पुलिस को पहले ही सूचना मिल गई थी कि किसान हिंसक रूप भी धारण कर सकते हैं। लिहाजा तीन दिन पहले से पुलिस ने उन्हें सीमाओं पर रोकने की तैयारियां शुरू कर दी थी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस आमतौर पर दो या तीन स्तरीय बैरिकेड लगाती है, लेकिन किसानों को रोकने के लिए सात स्तरीय बैरिकेड लगाए गए थे। PM मोदी की एक अपील ने इस क्षेत्र में तोड़ डाले सारे पुराने रिकॉर्ड यह भी पढ़ें सबसे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने दो स्तरीय बैरिकेड लगाए थे। उसके बाद 40 मीटर की दूरी पर दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेड लगाए गए थे। यूपी पुलिस के बैरिकेड के बाद दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड से पहले पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े रखे थे, जिसे जर्सी बैरियर कहते हैं। इस बैरिकेड को हटाना आसान नहीं होता है। मंगलवार सुबह जब किसान दिल्ली कूच करने लगे, तब यूपी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। अधिकारियों ने किसान नेताओं से बात की, लेकिन वे नहीं माने। किसानों ने जब धमकी दी तो यूपी पुलिस डर गई और उनके आगे घुटने टेक दिए। किसान टै्रक्टर से उनके दोनों बैरिकेड तोड़कर चंद मिनटों में दिल्ली पुलिस के जर्सी बैरियर के पास पहुंच गए। क्या पलवल की मस्जिद में लगा है पाकिस्तान का पैसा? मेवात के मदरसे भी NIA के रडार पर यह भी पढ़ें ... इस तरह पुलिस ने दिया किसानों को जवाब 2 अक्टूबर को सुबह 11 बजे के आसपास सैकड़ों की संख्या में लाठी लिए किसानों ने जब पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया तो, उसके बाद हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, फिर आंसू गैस व रबर बुलेट चलानी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारी का कहना है कि बड़ी मुश्किल से किसानों को देर रात तक दिल्ली आने से रोका गया। इस दौरान किसानों से निबटने को पुलिस पल-पल रणनीति बदलती रही। उसके बाद देर रात किसानों को किसान घाट जाने की अनुमति दे दी गई। तब तक करीब 80 फीसद किसान अपने घर लौट चुके थे। किसानों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए आयुक्त ने अपने कर्मचारियों की प्रशंसा की। वहीं, राजेश चौहान (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाकियू) का कहना है कि कोई कुछ भी कह सकता है लेकिन सच्चाई यही है कि किसानों की मांगों को सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सामने मजबूती के साथ रखा गया। उसी का असर है कि केंद्र की सरकार सात प्रमुख मांगों पर मानने को तैयार हो गई।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले ट्रैक्टर-ट्रॉली, टाटा-407 समेत अन्य वाहनों से लैस किसानों का आधी रात को हुआ समझौता कई सवाल पैदा कर रहा है। इस आंदोलन से किसानों को क्या मिला? यह भी समझ से परे है। …

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शर्मसार हरकत,अंतिम संस्कार के लिए कचरे की ट्रॉली में ले गए बुजुर्ग का शव

यह दृश्य दिल को झकझोरने और इंसानियत कोशर्मसार करने वाला था। यहां सिविल अस्पताल के मोर्चरी हाउस से एक व्यक्ति के शव को कचरे की ट्रॉली में लादकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों …

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एसआइटी हुई हैरान, जिनके पास जमीन नहीं उन्होंने बेच दिया लाखों के धान

बिहार के बहुचर्चित धान खरीद घोटाले की जांच में कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिससे इस घोटाले की जांच कर रही सीआइडी की एसआइटी (विशेष जांच दल) भी हतप्रभ है। 600 करोड़ रुपये से भी अधिक के इस घोटाले में कुछ ऐसे किसानों को धान खरीद के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया है, जिनके पास एक धुर जमीन भी नहीं है। ऐसे में घोटाले को अंजाम देने वालों की संपत्ति जब्त करने में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ADVERTISING inRead invented by Teads बता दें कि इस घोटाले से जुड़े राइस मिलरों की करीब पांच करोड़ से भी अधिक की चल और अचल संपत्ति को ईडी ने जब्त कर लिया है। जिन लोगों के नाम पर धान खरीद के करोड़ों रुपये बांट दिए गए, उनके संबंध में ईडी को कुछ खास जानकारी नहीं मिल पाई है। सीआइडी की एसआइटी ने धान बेचने वाले लोगों को चिह्नित करने के लिए कई जिलों में अंचलाधिकारियों (सीओ) को इसका जिम्मा दिया था। जब सीओ ने इस इस मामले की जांच की तब पाया कि वैसे लोगों को भी धान खरीद के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया है, जिनके पास एक धुर भी जमीन नहीं है। व्यवसायी को फोन पर कहा-30 लाख दो, मोबाइल बंद करते ही घर पर फेंका बम यह भी पढ़ें इतना ही नहीं, सीओ की जांच भी यह भी सामने आया कि जिस किसान के पास केवल 50 कठ्ठा जमीन है, उस किसान से 80-90 क्विंटल धान की खरीद दिखाकर उसे लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया है। कम रकबा वाले किसानों से 80-90 क्विंटल धान की खरीद न केवल धान का कटोरा कहे जाने वाले रोहतास, बक्सर, भोजपुर और कैमूर जिलों से की गई है, बल्कि उत्तर बिहार के मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और वैशाली जैसे जिले भी शामिल हैं। बता दें कि एसआइटी द्वारा धान खरीद के संबंध में दायर की गई चार्जशीट को आधार बनाकर ईडी की टीम घोटालेबाजों की संपत्ति जब्त कर रही है। अब ईडी के सामने मुश्किल यह है कि ऐसे किसानों के नाम पर करोड़ों के घोटाले को अंजाम दिए जाने के बाद वह आखिर कार्रवाई किसके खिलाफ करे।

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