‘2047 तक विकसित भारत के लिए सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी जरूरी’, केंद्रीय मंत्री रिजिजू बोलें

किरन रिजिजू ने राजगीर में आयोजित चिंतन शिविर में कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों की समान भागीदारी जरूरी है। केंद्र-राज्य तालमेल से योजनाओं के तेज और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को राजगीर में कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए देश के हर समुदाय का आगे आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश के सभी छह अल्पसंख्यक समुदाय- मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी- प्रगति की मुख्यधारा में एक साथ कदम बढ़ाएंगे। मंत्री नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित मंत्रालय के दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ में भाग लेने पहुंचे थे।

चिंतन शिविर के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अक्सर सरकारी योजनाएं कागजी कार्रवाई और फाइलों में अटक जाती हैं, जिससे उनके क्रियान्वयन में विलंब होता है। मोदी सरकार का लक्ष्य है कि योजनाओं में देरी न हो। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए ही यह बैठक बुलाई गई है। जब अधिकारी आमने-सामने बैठकर बात करेंगे, तो फाइलों का मूवमेंट तेज होगा और काम तुरंत धरातल पर उतरेगा।

रिजिजू ने कहा कि हर राज्य के अधिकारियों का अपना अनुभव होता है और उनके पास कुछ नए विचार भी होते हैं। इस शिविर में वे अपने अनुभव साझा करेंगे। केंद्र की टीम राज्यों की समस्याओं को सीधे सुनेगी और मिलजुलकर समाधान निकालेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम अलग-अलग नहीं, बल्कि एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं।

राजगीर अध्यात्म और ज्ञान की धरती
इससे पूर्व, राजगीर पहुंचने पर उन्होंने इस स्थान की ऐतिहासिकता और पवित्रता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजगीर दुनिया भर में मशहूर है और आध्यात्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। एक बौद्ध होने के नाते यह मेरे लिए तीर्थ स्थान जैसा है। यहां आकर काम करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

छह समुदायों पर विशेष फोकस
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि देश में अल्पसंख्यक आबादी में मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा है, इसके बाद ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी आते हैं। मंत्रालय इन छह समुदायों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। शिविर में इन समुदायों के लिए चल रही पुरानी योजनाओं की समीक्षा होगी और भविष्य के लिए नए विचारों पर मंथन किया जाएगा।

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