भीष्म अष्टमी पर क्या करें और क्या नहीं? रखें इन बातों का ध्यान

माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी (Bhishma Ashtami 2026) मनाई जाती है। यह वह दिन है जब गंगापुत्र भीष्म ने प्राण त्यागे थे। यह दिन पितृ तर्पण, दान और पूजा-पाठ के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन भीष्म पितामह के निमित्त जल में काले तिल और कुश डालकर तर्पण करना चाहिए। आइए इस दिन से जुड़े कुछ नियमों को जानते है।

Bhishma Ashtami 2026: हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी मनाई जाती है। यह वही पावन तिथि है, जब गंगापुत्र भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने प्राण त्याग दिए थे। इस साल यह तिथि 26 जनवरी यानी आज पड़ रही है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह दिन पितृ तर्पण, दान और पूजा-पाठ के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है, लेकिन इस दिन को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं। अगर आप भी इस दिन का पूरा फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस दिन (Dos and Don’ts) के नियम का पालन जरूर करें, जो इस प्रकार हैं –

क्या करें? (Bhishma Ashtami 2026 Do’s)
भीष्म पितामह के निमित्त जल में काले तिल और कुश डालकर तर्पण करें। शास्त्रों के अनुसार, जिनके पिता जीवित हैं, वे भी पितामह भीष्म के लिए तर्पण कर सकते हैं। इससे पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
हाथ में जल लेकर “वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च। गंगापुत्राय भीष्माय प्रदास्येऽहं तिलोदकम्॥” मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव और पितामह भीष्म को अर्घ्य दें।
भीष्म पितामह ने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया था, इसलिए इस दिन मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें और सात्विक जीवन जिएं।
इस दिन जरूरतमंदों को तिल, गुड़, गरम कपड़े और अन्न का दान करना महापुण्य माना गया है। इससे कुंडली के ग्रह दोष भी शांत होते हैं।
अगर हो पाए तो इस दिन भीष्म राज स्तोत्र का पाठ करें। इससे भय का नाश होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

क्या न करें? (Bhishma Ashtami 2026 Don’ts)
भीष्म अष्टमी के दिन भूलकर भी मांस, मदिरा, प्याज या लहसुन का सेवन न करें। इस दिन पूरी तरह सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
घर में या बाहर किसी से विवाद न करें। इस दिन किसी बड़े-बुजुर्ग का अपमान करना आपके पितृ दोष को बढ़ा सकता है।
इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। आलस्य और देर तक सोना इस दिन वर्जित माना गया है।
इस दिन बाल, दाढ़ी या नाखून काटना अशुभ माना जाता है। ऐसे में इस दिन इन कार्यों से बचें।
इस दिन किसी की बुराई या असत्य बोलने से बचें। इससे पूजा का फल नहीं मिलता है।

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