प्रिंटिंग में उलझे 1.94 लाख नोटिस, 3.89 लाख की सुनवाई लंबित

आगरा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण में प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है। करीब 48 दिन बीतने के बाद भी 1.94 लाख मतदाताओं के नोटिस प्रिंट तक नहीं हो सके हैं। वहीं 3.89 लाख मतदाताओं की सुनवाई अब भी अधर में फंसी है। यदि यही स्थिति रही, तो जिले के लाखों नागरिकों से उनका मताधिकार छिन सकता है।

जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर प्रक्रिया से पहले कुल 36 लाख मतदाता थे। पुनरीक्षण के बाद 8.36 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इसके अतिरिक्त, 7.64 लाख ऐसे मतदाता चिह्नित किए गए हैं जिनका ब्योरा वर्ष 2003 की आधार सूची से मेल नहीं खा रहा है। अपना मताधिकार बचाने के लिए इन सभी को संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं, जिसके लिए प्रशासन इन्हें नोटिस जारी कर अंतिम मौका दे रहा है।

जिला निर्वाचन कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 6 जनवरी से शुरू हुए दूसरे चरण में इन 7.64 लाख मतदाताओं के वोट पर तलवार लटकी हुई है। यदि 27 मार्च तक इनकी सुनवाई पूरी नहीं हुई, तो इनका नाम मतदाता सूची से काट दिया जाएगा। हालांकि, दूसरा चरण शुरू हुए 48 दिन बीतने के बाद भी प्रशासन सभी नोटिस तामील नहीं करा सका है। 22 फरवरी तक कुल संदिग्ध मतदाताओं में से केवल 5.70 लाख के ही नोटिस प्रिंट हो पाए हैं, जबकि 1.94 लाख नोटिस अब भी प्रिंट नहीं हो सके हैं। सवाल यह उठता है कि जब नोटिस ही प्रिंट नहीं हुए, तो वे मतदाताओं तक कब पहुंचेंगे और उनकी आपत्तियों पर सुनवाई कब होगी।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान का दावा है कि 22 फरवरी तक 7.64 लाख में से 3.75 लाख मतदाताओं की सुनवाई प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। हालांकि, असली संकट उन 3.89 लाख मतदाताओं का है जिनकी सुनवाई अभी शेष है। 27 मार्च तक की समय-सीमा है। ऐसे में प्रतिदिन हजारों की संख्या में सुनवाई करना प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनवाई पूरी न होने की स्थिति में संबंधित मतदाता का नाम सूची से कट जाएगा। उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि समय से नोटिस जारी करने के साथ ही आपत्तियों पर सुनवाई भी पूरी कर ली जाएगी।

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