यूपी के सियासी होर्डिंग में पहली बार योगी के बराबर ब्रजेश पाठक को तरजीह

हाई स्पीड नमो भारत-मेरठ मेट्रो की रफ्तार के बहाने रविवार को शंकराचार्य कांड और यूजीसी प्रकरण पर ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की गई। पहली बार सरकारी होर्डिंग पर प्रधानमंत्री के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ के बराबर ही उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की तस्वीरों को तरजीह दी गई। मोदी-योगी की तरह मोदी-ब्रजेश पाठक की होर्डिंग को यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल सियासी हलकों में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले होर्डिंग पर मोदी-ब्रजेश की जोड़ी के मायने भी निकाले जाने लगे हैं।

खास बात यह है कि पीएम मोदी की सभास्थल से पहले दिल्ली रोड पर यह होर्डिंग मोदी के स्वागत में भाजपा संगठन या पार्टी समर्थकों की ओर से नहीं, बल्कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से लगाई गई है। जगजाहिर है कि यूजीसी प्रकरण पर सरकार के कड़े विरोध के बाद प्रयागराज के माघ मेले में हुए चोटीकांड ने भाजपा की पेशानी पर बल डाल दिया है।

आगामी विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, वहीं चोटी खींचकर बटुकों की पिटाई के मामले पर पार्टी राजनीतिक भंवर में फंसती नजर आने लगी है। इससे उसके पारंपरिक वोट बैंक के तौर पर ब्राह्मणों के खिसकने का खतरा पैदा होने के कयास लगाए जा रहे हैं। यह नौबत तब आई है, जब भाजपा यूपी में वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार से उबरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में पारंपरिक वोट बैंक को दरकने से रोकने की चिंता ने कहीं न कहीं शीर्ष नेतृत्व को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषक चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. स्नेहवीर पुंडीर कहते हैं कि यूजीसी प्रकरण के बाद शंकराचार्य कांड को लेकर यूपी में ब्राह्मणों में जबरदस्त निराशा और नाराजगी सामने आई है। ऐसे में मोदी-पाठक की तस्वीरों वाला होर्डिंग ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की रणनीति का हिस्सा लगता है। डिप्टी सीएम पाठक बटुकों की चोटी खींचने के प्रकरण पर चिंता जताने के साथ ही हाल के दिनों में ही अपने आवास पर बटुकों की आरती उतार कर ब्राह्मणों के जख्म पर मरहम लगा चुके हैं।

प्रो. पुंडीर कहते हैं कि ऐसे हालात में भाजपा ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पाठक को आगे कर रही है, ताकि पूरब से पश्चिम तक ब्राह्मणों की नाराजगी दूर की जा सके। बीते लोकसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो यूपी में भाजपा की सीटों की संख्या 2024 में 71 से घटकर मात्र 33 रह गई थी। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा किसी तरह की तकनीकी चूक नहीं होने देना चाहती।

ब्राह्मण बोट बैंक बचाने की चिंता
लंबे समय से ब्राह्मण वोटरों ने भाजपा पर भरोसा किया है। रणनीतिकार मानते हैं कि खासकर 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 के विस चुनावों में ब्राह्मण भाजपा के ही साथ रहा है। इसलिए भाजपा के लिए ब्राह्मण वोट बैंक रणनीतिक लिहाज से बेहद खास माना जाता है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए यूपी की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी सपा ब्राह्मण समाज को अपनी ओर आकर्षित करने में जुट गई है। ऐसे में भाजपा के चिंतक मानते हैं कि आगामी विधान सभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर चल रही सत्ता की खींचतान और बाहर की विरोधी बयार उसके लिए बाधक साबित हो सकती है।

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