राजधानी में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक को लेकर सख्त कदम उठाए गए हैं। दिल्ली में 19 तरह के सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध है और बिना प्रमाणित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बेचना गैरकानूनी है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने पर 85 कंपनियों को शो कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। यह खुलासा दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में किया है। इसमें बताया गया है कि प्लास्टिक कचरे के सही निपटान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच दिल्ली सरकार गंभीर है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा 2022 में लागू किए गए एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) नियमों के तहत प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को अपने प्लास्टिक कचरे की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है। इसी तरह, प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करने वालों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। दिल्ली सरकार का दावा है कि इन नियमों से प्लास्टिक कचरे पर बेहतर नियंत्रण संभव हुआ है।
यह हलफनामा एक मीडिया रिपोर्ट के जवाब में दिया गया है, जिसमें यह दावा किया गया था कि राजधानी में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा गायब हो रहा है। सरकार का कहना है कि प्लास्टिक कचरे को लेकर नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है और जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के निदेशक निगम अग्रवाल ने रिपोर्ट मं बताया है कि सरकार प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऐसे में दिल्ली में अब तक 2386 पीआईबीओ और 494 पीडब्ल्यूपी ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। इनमें से 2264 पीआईबीओ और 422 पीडब्ल्यूपी को मंजूरी मिल चुकी है।
जागरूकता बढ़ाने के लिए अखबारों में नोटिस जारी
रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कंपनियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अखबारों में नोटिस जारी किए। इसमें औद्योगिक क्षेत्रों में सर्वे कराए, इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ बैठकें कीं और निरीक्षण भी किए। यही नहीं, रिपोर्ट में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी रजिस्टर्ड कंपनियों को 30 नवंबर 2025 तक अपना सालाना रिटर्न दाखिल करना होगा।
ऐसा न करने पर सिस्टम अपने आप रिटर्न तैयार करेगा, अगले साल का लक्ष्य 25 प्रतिशत बढ़ा दिया जाएगा और पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना भी लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में कुल मिलाकर ढाई लाख टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए रिसाइक्लिंग, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कुल ईपीआर टारगेट करीब 14,356 टन रिजिड प्लास्टिक
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईपीआर पोर्टल अप्रैल 2022 में लॉन्च हुआ था। तब से दिल्ली में पीआईबीओ और पीडब्ल्यूपी की हजारों एप्लीकेशन आईं। ज्यादातर को मंजूरी मिल गई, लेकिन कुछ रिजेक्ट हुईं। दिल्ली में कुल ईपीआर टारगेट करीब 14,356 टन रिजिड प्लास्टिक, 2,09,860 टन फ्लेक्सिबल प्लास्टिक, 26,375 टन मल्टीलेयर प्लास्टिक और 751 टन कंपोस्टेबल प्लास्टिक का है।
रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह प्लास्टिक कचरा प्रोसेस करने वाली यूनिट्स (पीडब्ल्यूपी) के लिए भी रजिस्ट्रेशन जरूरी है। दिल्ली में 494 एप्लीकेशन आईं, जिनमें से 430 को रजिस्ट्रेशन मिला। इनमें ज्यादातर 422 रिसाइक्लिंग यूनिट्स हैं। साथ ही, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट्स 5, सीमेंट फैक्ट्रियों में को-प्रोसेसिंग 1, वेस्ट टू ऑयल 1 और इंडस्ट्रियल कंपोस्टिंग (1) शामिल हैं।
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