गुरु रविदास जी के इन अनमोल विचारों में छिपा है हर समस्या का समाधान

भारत में ऐसे कई महान संतों ने जन्म लिया है, जिनके विचारों को आज भी याद दिया किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरु रविदास जयंती आज यानी 1 फरवरी को मनाई जा रही है।

उन्होंने अपने जीवन के दौरान समाज में फैली बुराईयों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उनके अनमोल विचार वर्तमान में भी शुद्धता और मन की पवित्रता का रास्ता दिखाते हैं। प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक, माघ पूर्णिमा के दिन गुरु रविदास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन गुरु रविदास जयंती मनाई जाती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं गुरु रविदास जी के अनमोल विचार ।

संत रविदास जी के अनमोल विचार
सच्चा भक्त वही है, जो अपने मन में प्रभु को धारण करता है और बिना किसी भेदभाव के सभी से प्रेम करता है।

ऐसा राज्य चाहता हूं जहां सभी को भोजन मिले, सब लोग समान रहें और खुश रहें

सेवा और प्रेम ही सच्ची भक्ति है, जाति और जन्म से कोई बड़ा या छोटा नहीं होता।

माता-पिता और गुरु तीनों देवताओं के समान हैं, इनकी सेवा करो और ईश्वर का भजन करो

जीव को यह भ्रम है कि यह संसार ही सत्य है किंतु जैसा वह समझ रहा है वैसा नहीं है, वास्तव में संसार असत्य है.

ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन, पूजिए चरण चंडाल के जो होवे गुण प्रवीन।

कर्म करना हमारा धर्म है, फल पाना हमारा सौभाग्य है

गुरु रविदास जी के दोहे
1.रैदास ब्राह्मण मति पूजिए, जो होवै गुन हीन।
पूजिहिं चरन चंडाल के, जउ होवै गुन प्रवीन।।

2.कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै।
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै।।

3.जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात।
रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।

4.हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस।
ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास।।

5.करम बंधन में बन्ध रहियो फल की ना तज्जियो आस
कर्म मानुष का धर्म है सत् भाखै रविदासण

6.रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच,
नर कूं नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच।

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