दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ हर बार पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का वादा किया जाता है। परियोजनाओं में काटे गए पेड़ों के बदले मुआवजा पौधारोपण की बात की जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत एक बार फिर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। नेशनल हाईवे प्राधिकरण ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने हाल ही में दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में दो बड़ी परियोजनाओं अर्बन एक्सटेंशन रोड-दो (यूईआर-दो) और द्वारका एक्सप्रेसवे में मुआवजा पौधारोपण को लेकर खामियों को उजागर किया है।
एनएचएआई के अनुसार, यूईआर-दो परियोजना के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को 64,080 पेड़ लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसके लिए वर्ष 2021 में 55.10 करोड़ जमा कराए थे। वहीं, द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए 153,990 पेड़ों के मुआवजा पौधारोपण हेतु वर्ष 2020 में 87.77 करोड़ की राशि डीडीए को दी गई। कुल मिलाकर, इन दोनों परियोजनाओं में 2.18 लाख से अधिक पेड़ों का रोपण होना था।
10 जनवरी को प्रस्तुत एनएचएआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यूईआर-दो के मामले में डीडीए ने अगस्त 2024 में दावा किया था कि 57,280 पेड़ लगाए जा चुके हैं। लेकिन जब संयुक्त स्थल निरीक्षण किया, तो मौके पर सिर्फ 24,887 पेड़ ही मिले। सूत्रों ने बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे (एनएच-248बीबी) के मामले में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यह 29 किलोमीटर लंबा मार्ग दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यातायात दबाव कम करने के लिए बनाया है। दिल्ली संरक्षण अधिनियम, 1994 के तहत यहां 1.53 लाख से अधिक पेड़ों का मुआवजा पौधारोपण निवार्य था।
डीडीए ने अगस्त 2024 में दावा किया कि 1,51,452 पेड़ लगाए जा चुके हैं, लेकिन संयुक्त निरीक्षण में पाया गया कि मौके पर लगभग आधे पेड़ ही मौजूद हैं। दस्तावेजों के अनुसार, डीडीए ने यूईआर-दो के लिए कुसुमपुर पहाड़ी, तुगलकाबाद जैव विविधता पार्क, अरावली जैव विविधता पार्क और कालिंदी जैव विविधता पार्क में पौधारोपण का दावा किया था। कालिंदी पार्क में पौधारोपण नष्ट होने के बाद परियोजना को तुगलकाबाद स्थानांतरित करने और वहां काम पूरा होने की बात भी कही गई।
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