Wednesday , 6 July 2022

वो 15 बातें जो हर भाजपा भक्त को जरुर जाननी चाहिए

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हाल में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत की वजहों पर चर्चा पूरे देश में हो रही है. 1947 में देश की आजादी के बाद सत्ता के केन्द्र पर बैठी कांग्रेस लंबे समय तक देश की सबसे बड़ी पार्टी बनी रही. फिर 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा खड़े किए गए भारतीय जन संघ से 1980 में अलग होकर बनी भारतीय जनता पार्टी आज देश की सबसे बड़ी पार्टी है. लोकसभा में पूर्ण बहुमत के साथ पार्टी देश के कई राज्यों की सत्ता पर काबिज है.

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वो 15 बातें जो हर भाजपा भक्त को जरुर जाननी चाहिएबीजेपी के 37 साल के इस इतिहास में कई ऐसे तथ्य दर्ज है जिसने कांग्रेस के जवाब में खड़ी हुई इस पार्टी को 4 दशकों में सत्ता के केन्द्र में पहुंचा दिया है. आइए जानते हैं ऐसी कुछ बातें जो मौजूदा समय में देशभर में बीजेपी के समर्थक और भक्तों को जानना जरूरी है. ये बातें जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इन्हीं बातों ने बीजेपी को कांग्रेस से अलग खड़ा किया और आज बीजेपी के उदय में कांग्रेस अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही है.

1. बीजेपी की नींव 6 अप्रैल 1980 को 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा बनाई गई भारतीय जन संघ से अलग होकर रखी गई. कांग्रेस में परिवारवाद और व्यापक भ्रष्टाचार के जवाब में यह पार्टी अस्तित्व में आई और अटल बिहारी बाजपेई और लाल कृष्ण आडवाणी इसके फाउंडर मेंबर रहे.

2. बीजेपी का चुनाव चिन्ह कमल का फूल है जिसके कई मायने हैं. सबसे अहम है कि बीजेपी इस चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल अपना राष्ट्रीय चरित्र प्रदर्शित करने के लिए करती है. इस चिन्ह को बीजेपी अखंड भारत की अपनी परिकल्पना के साथ भी जोड़ते हुए मां सरस्वती का रूप मानती है जो शिक्षा और प्रशिक्षण का प्रतीक हैं.

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3. बीजेपी देश को एक ऐसा सशक्त और खुशहाल देश बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो नवीन, प्रगतिशील होने के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित हो.

4. बीजेपी देश को एक बहुसंख्यक शासित राज्य बनाने की परिकल्पना पर काम करती है. ऐसा राज्य जो देश के सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर दे. इसके लिए वह सबका साथ और सबका विकास का नारा देती है.

5. बीजेपी की राजनीतिक व्यवस्था को देश के प्रति प्रेम और देश भक्ति के सहारे परिभाषित किया जाता है. लिहाजा पार्टी गो हत्या जैसे कृत्य को अपराध मानती है क्योंकि गाय हिंदू की माता है. हालांकि बीजेपी सामाजिक एकता की बात भी करती है लेकिन वह धर्मनिरपेक्षता की यूरोपीय परिभाषा को नहीं मानती है. कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता को बीजेपी हमेशा से मुस्लिम तुष्टीकरण का नाम देती आई है.

6. कांग्रेस की तुलना में बीजेपी राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर अधिक राष्ट्रवादी रुख रखती है. इसके चलते ही अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने देश को नाभकीय हथियार से लैस करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की चिंता किए बगैर नाभिकीय परीक्षण को पूरा किया.

7. बीजेपी आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कानून बनाने की पक्षधर है. देश में आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने और पड़ोसी देशों में पनप रहे आतंकवाद के मुद्दों को वह पूरी ताकत के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने में विश्वास रखती है.

8. भारतीय जन संघ के दिनों से श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर के लिए संविधान में विशेष प्रावधान(अनुच्छेद 370) किए जाने का विरोध कर रहे थे. इसके चलते जन संघ के बाद बीजेपी संविधान से अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग करती रही है.

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9. यूनीफॉर्म सिविल कोड पर बीजेपी का मत है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान अधिकार होने चाहिए. पार्टी का मानना है कि इस कोड को लागू करने के बाद ही देश में महिलाओं को समान अधिकार दिया जा सकता है.

10. कांग्रेस के विरोध में राष्ट्रीय राजनीति के मंच पर पहुंचने के लिए बीजेपी ने 1990 में रथयात्रा निकाली थी. सोमनाथ से अयोध्या तक दौड़े इस रथ पर बीजेपी के फाउंडर मेंबर लाल कृष्ण आडवाणी सवार थे. इस रथ के संचालन की पूरी जिम्मेदारी नरेन्द्र मोदी पर थी. इस वक्त मोदी पार्टी की गुजरात इकाई में महासचिव प्रबंधन के पद पर थे. रथ को सोमनाथ से अयोध्या तक सुरक्षित पहुंचाकर मोदी ने पार्टी को अपनी संचालन क्षमता का लोहा मनवा लिया था.

11. रथयात्रा की जिम्मेदारी के चलते नरेन्द्र मोदी देश और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को पार्टी की तरफ से आधिकारिक सूचना देते थे. इस किरदार में पहली बार मोदी ने वीपी सिंह और मुलायम सिंह यादव तक को चुनौती दे डाली थी कि उनकी हिम्मत हो तो देश के किसी कोने में रथयात्रा को रोक कर दिखाएं.

12. बीजेपी की इस रथयात्रा को विश्व हिंदू परिषद का पुरजोर समर्थन मिला. दरअसल, इस वक्त वीएचपी गुजरात इकाई के महासचिव प्रवीण तोगड़िया थे. तोगड़िया और नरेन्द्र मोदी सहयोगी प्रचारक के साथ-साथ अच्छे दोस्त भी थे. देशभर में रथयात्रा को कारगर बनाने के लिए तोगड़िया ने 101 राम ज्योति यात्रा और 15,000 विजय दशमी यात्रा वीएचपी के बैनर तले निकालीं.

13. बीजेपी 1980 में स्थापना के साथ ही स्वदेशी की प्रबल समर्थक रही है. स्वदेशी के मुद्दे पर स्वदेशी जागरण मंच का संघ परिवार से गहरा नाता है. बीजेपी अपने घोषणा पत्र में स्वदेशी को रखने के साथ-साथ कांग्रेस की पूर्व सरकारों के कार्यकाल के दौरान स्वदेशी के मुद्दे पर कई बार विरोध दर्ज करा चुकी है. बीजेपी का मानना है कि सभी सभ्यताएं अपने हुनर पर विकसित होती है. इसके साथ ही इंडिया फर्स्ट का नारा देते हुए बीजेपी देश को आत्मनिर्भर बनाने की पक्षधर रहती है.

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14. अयोध्या में राम मंदिर बनवाना बीजेपी के लिए करोड़ों हिंदुओं की आस्था के लिए जरूरी है. बीजेपी का मानना है कि वह इस मुद्दे पर न्यायालय के आदेश को मानेगी हालांकि उसका कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने का सबसे बेहतर तरीका दोनों समुदायों के नेताओं की सहमति है. पार्टी के मुताबिक ऐसा होने से हिंदू और मुसलमान के राष्ट्रीय एकीकरण से आपसी रिश्तों का नया अध्याय लिखा जा सकता है.

15. बीजेपी के लिए कांग्रेस विरोध की राजनीति बेहद अहम रही है. जनसंघ के दिनों में जवाहरलाल नेहरू का विरोध जनसंघ संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने किया. इसके बाद इमरजेंसी के दौर में जनता पार्टी से अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी इंदिरा गांधी के विरोध में रहे. इंदिरा गांधी के बाद जब राजीव गांघी की सरकार बनी तब बीजेपी ने कांग्रेस विरोध के सुर को तेज करते हुए उसे परिवारवाद और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा.

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