पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट से कटा नाम, फिर भी रचा इतिहास

पश्चिम बंगाल के फरक्का निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है। दरअसल,विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में नाम कटने के बावजूद कांग्रेस के एक उम्मीदवार ने न सिर्फ अपना नाम मतदाता सूची में फिर से जुड़वाया। इसके साथ ही निर्वाचन क्षेत्र में जीत भी हासिल की। यह कहानी है, कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख की।

जिन्होंने बंगाल विधानसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद जिले की फरक्का विधानसभा सीट पर जीत हासिल की है। शेख ने BJP के सुनील चौधरी को 63,050 वोट लाकर 8,193 वोटों से हराया; जबकि चौधरी को 54,857 वोट मिले। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अमीरुल इस्लाम 47,256 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

SIR में नाम कटने के बाद भी मारी बाजी

मोताब शेख की यह जीत इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि SIR प्रक्रिया के बाद शुरुआत में ही उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष अपने नाम को सूची से हटाए जाने के फैसले को चुनौती दी। यह ट्रिब्यूनल उन 19 निकायों में से एक था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर ऐसे मामलों की जांच के लिए गठित किया गया था।

ट्रिब्यूनल ने नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि से ठीक पहले उनके मतदान के अधिकार बहाल कर दिए, जिससे उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई। शेख के मामले में, कलकत्ता हाई कोर्ट के वकील फिरदौस शमीम ने विचार भवन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेज जमा किए, जिसके परिणामस्वरूप मतदाता सूची में उनका नाम फिर से शामिल कर लिया गया।

कांग्रेस को एक और सीट पर मिली जीत

मालूम हो कि, सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर, 2025 के आदेश का हवाला देते हुए, पूर्व न्यायाधीश टी.एस. शिवज्ञानम ने यह टिप्पणी की कि, “आधार कार्ड को एक सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से सूचीबद्ध किए गए दस्तावेजों में से एक है।”

इसके अलावा कांग्रेस ने पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्र रानीनगर में भी जीत दर्ज की, जहां उसके उम्मीदवार जुल्फिकार अली ने तृणमूल के सौमिक हुसैन को 2,701 वोटों से हराया। यह जीत राज्य में पार्टी के लिए एक छोटी, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण वापसी का संकेत है।

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