क्या मौसम का मिजाज तय कर रहा है प्रेग्नेंसी में बच्चे का जेंडर?

क्या आप जानते हैं कि बढ़ती हुई गर्मी अब सिर्फ हमारे पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि इंसानों के जन्म लेने की प्रकृति को भी बदल रही है? जी हां, एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान ज्यादा गर्मी झेलने के कारण लड़कों के जन्म की दर में कमी आ रही है।

50 लाख जन्मों पर हुआ बड़ा शोध
यह महत्वपूर्ण अध्ययन ब्रिटेन की मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। इस शोध के लिए उन्होंने भारत और उप-सहारा अफ्रीका में हुए लगभग 50 लाख बच्चों के जन्म के आंकड़ों का विश्लेषण किया और इसे उस समय के तापमान के रिकॉर्ड के साथ जोड़कर देखा। इस रिसर्च की रिपोर्ट ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ नामक पत्रिका में प्रकाशित की गई है।

अफ्रीका और भारत में अलग-अलग प्रभाव
इस रिसर्च से कई हैरान करने वाले नतीजे मिले हैं। अध्ययन के मुताबिक, उप-सहारा अफ्रीका में अगर महिलाएं अपनी गर्भावस्था के शुरुआती दौर (पहली तिमाही) में ज्यादा गर्मी के संपर्क में आती हैं, तो वहां लड़कों के जन्म में कमी देखी गई। वहीं दूसरी तरफ, भारत में इसका असर गर्भावस्था के बीच के समय (दूसरी तिमाही) में सबसे ज्यादा स्पष्ट रूप से देखा गया।

भारत में किन महिलाओं पर दिखा ज्यादा असर?
भारत के संदर्भ में इस शोध ने कुछ विशेष बातें भी उजागर की हैं। यहां गर्मी का यह प्रभाव कुछ खास महिलाओं पर ज्यादा गहराई से पड़ा है। इनमें अधिक उम्र वाली माताएं, वे महिलाएं जो पहले भी कई बच्चों को जन्म दे चुकी हैं, और विशेष रूप से उत्तर भारत की वे महिलाएं शामिल हैं जिनका पहले से कोई बेटा नहीं है।

तापमान और लड़कों की कमी के बीच का वैज्ञानिक संबंध
शोधकर्ताओं ने एक और अहम आंकड़ा साझा किया है। उनके अनुसार, जब भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तो यह भारत और उप-सहारा अफ्रीका, दोनों ही जगहों पर लगातार लड़कों के जन्म को प्रभावित करता है। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे का कारण बताते हुए विश्लेषण में यह संकेत दिया गया है कि अधिक तापमान, खास तौर पर प्रेगनेंसी की शुरुआत में, पुरुष भ्रूण (गर्भ में पल रहे नर बच्चे) की मृत्यु दर को बढ़ा सकता है। इस शोध से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि मौसम का बढ़ता तापमान अब सीधे तौर पर गर्भ में पल रहे बच्चों के जीवित रहने की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com