सीएम मान के गांव सतौजा में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब ‘युद्ध बेरोजगारी विरुद्ध’ अभियान के तहत राज्यभर से जुटे बेरोजगार संगठनों ने वहां डेरा डाल दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के पैतृक गांव सतौज में सोमवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब ‘युद्ध बेरोजगारी विरुद्ध’ अभियान के तहत राज्यभर से जुटे बेरोजगार संगठनों ने वहां डेरा डाल दिया। प्रशासन को चकमा देकर गांव में दाखिल हुए 646 बेरोजगार पीटीआई अध्यापक यूनियन के सदस्यों गुरसेवक सिंह व बलविंदर सिंह ने मोबाइल टावर पर चढ़कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
दूसरी तरफ गांव की सीमा पर भारी पुलिस बल ने अन्य प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद गुस्साए बेरोजगारों ने नहरी नाले के पास ही पक्का धरना शुरू कर दिया।
बेरोजगार संगठनों ने मुख्यमंत्री के गांव में ‘बेरोजगारों की सत्थ’ (चौपाल) लगाने का एलान किया था। खुफिया इनपुट के बाद पुलिस प्रशासन ने गांव सतौज के आसपास के इलाके को छावनी में बदल दिया। इसके बावजूद, कुछ संगठनों के सदस्य पुलिस को चमका देकर गांव में प्रवेश करने में सफल रहे। गांव में दाखिल होते ही आंदोलनकारियों ने वहां लगे एक ऊंचे टावर पर चढ़कर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
बैरिकेड्स पर तीखी बहस, धरने पर बैठे
दूसरी ओर वीरकलां से सतौज की तरफ बढ़ रहे बेरोजगारों के बड़े काफिले को भारी पुलिस बल ने गांव की सीमा से ठीक पहले रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई। गांव में प्रवेश न मिलने से नाराज संगठनों ने सतौज की सीमा से सटे नहरी नाले पर ही दरी बिछा दी और वहीं पर समानांतर धरना शुरू कर दिया।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे रमन कुमार मलोट, सुखविंदर सिंह ढिलवां और अमनदीप सिंह ने मुख्यमंत्री पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि खुद को आम घर का बेटा बताने वाले मुख्यमंत्री, बेरोजगारों को अपने गांव में भी पैर नहीं रखने दे रहे हैं। यहां कोई हिंसा करने नहीं बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने आए हैं। यह सख्ती सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की हत्या है।
घटनास्थल पर मौजूद एसपी नवरीत सिंह विर्क ने कहा कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों के चलते प्रदर्शनकारियों को गांव के भीतर जाने से रोका गया है। टावर पर चढ़े युवाओं को भरोसे के बाद सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
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