चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीनी सेना में बड़ा बदलाव करते हुए अब पूरा नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है। जानकारी के मुताबिक, जिनपिंग ने सेना के सबसे ताकतवर जनरल को किनारे लगा दिया है।
चीन के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख शी जिनपिंग ने अपने सबसे भरोसेमंद सैन्य सहयोगी और देश के सर्वोच्च सक्रिय जनरल झांग योउश्या को जांच के दायरे में लाकर न केवल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की शीर्ष संरचना को हिला दिया है, बल्कि सेना के ऑपरेशनल कंट्रोल को लगभग पूरी तरह अपने हाथों में समेट लिया है।
चीनी सैन्य नेतृत्व में सबसे बड़ा बदलाव
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के मुताबिक यह 1989 के तियान आनमेन स्क्वायर के बाद चीनी सैन्य नेतृत्व में सबसे बड़ा बदलाव है। कुछ सेवानिवृत्त चीनी सैन्य अधिकारियों और सुरक्षा विश्लेषकों का दावा है कि यह कार्रवाई केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं, बल्कि सेना के भीतर संभावित असंतोष और नेतृत्व को लेकर उभर रही चुनौती को कुचलने की व्यापक कोशिश का हिस्सा भी हो सकती है।
जनरल झांग पर थे तमाम आरोप
चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि जनरल झांग पर पार्टी अनुशासन और राज्य कानूनों के गंभीर उल्लंघन के आरोपों की जांच की जा रही है। झांग सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष थे और व्यावहारिक रूप से पीएलए के सर्वोच्च सक्रिय कमांडर माने जाते थे। वे 24 सदस्यीय पोलितब्यूरो का भी हिस्सा थे जो चीन की सर्वोच्च सत्ता संरचना है।
चीनी कम्युनिस्ट क्रांति के संस्थापकों में शामिल थे झांग के पिता
बीबीसी और फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार झांग योउश्या उन गिने-चुने पीएलए अधिकारियों में शामिल हैं जिनके पास वास्तविक युद्ध अनुभव है। उन्होंने 1979 में वियतनाम के खिलाफ चीन के युद्ध में हिस्सा लिया था। उनका पारिवारिक बैकग्राउंड भी असाधारण रहा है। उनके पिता चीनी कम्युनिस्ट क्रांति के संस्थापक जनरलों में से थे और शी जिनपिंग के पिता के साथ गृहयुद्ध में लड़े थे। इसी साझा क्रांतिकारी विरासत के कारण झांग को लंबे समय तक शी का सबसे भरोसेमंद सैन्य स्तंभ माना जाता रहा।
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