हरियाणा में मौसम ने ली करवट: सरसों की फसल को लेकर किसानों में चिंता

हरियाणा के विभिन्न हिस्सों में रविवार सुबह हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाओं ने मौसम को सुहावना बना दिया, लेकिन इससे सरसों की खड़ी फसल को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। नारनौल, पानीपत, बहादुरगढ़ और रोहतक जैसे जिलों में हुई इस असामयिक बारिश से किसान परेशान हैं, क्योंकि सरसों की फसल पककर तैयार है और बारिश या तेज हवा से फसल झड़ने या गिरने का खतरा मंडरा रहा है।

सरसों की फसल पर मंडराया खतरा
नारनौल क्षेत्र में सुबह हुई हल्की बूंदाबांदी से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यहां करीब एक लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में सरसों की फसल खड़ी है। किसान बताते हैं कि यदि मौसम और बिगड़ता है तो पकी हुई फसल को भारी नुकसान हो सकता है। कई किसान कटाई की तैयारी में हैं, लेकिन अनिश्चित मौसम के कारण इंतजार करना पड़ रहा है। पानीपत में भी सरसों उत्पादक किसानों ने फसल झड़ने की आशंका जताई है, जबकि गेहूं की फसल को इस बारिश से कुछ राहत मिली है। रोहतक में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई लेकिन सड़कों पर जलजमाव भी देखा गया।

15-16 मार्च को बारिश और आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, 15 और 16 मार्च को हरियाणा के पश्चिमी हिस्सों में हल्की बिखराव वाली बारिश या बूंदाबांदी के साथ 20-30 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। शेष हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश, 30-40 किमी/घंटा की तेज हवाएं और कहीं-कहीं आंधी-तूफान की संभावना है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है, जिससे फसलों को अतिरिक्त खतरा है।

18 मार्च से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय
राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब नोडल के अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, 18 मार्च से एक नया सशक्त पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके प्रभाव से 19 से 21 मार्च तक हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली में अधिकांश जगहों पर आंधी, अंधड़ और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी संभव है।किसान मौसम साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं और फसलों की सुरक्षा के लिए सतर्क हैं। कृषि विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि पकी सरसों की कटाई सुबह या शाम के समय करें और उपज को सुरक्षित स्थान पर रखें।

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