सुबह के समय क्यों सोच-समझकर बोलना चाहिए?

हिंदू धर्म और प्राचीन शास्त्रों में ‘ब्रह्म मुहूर्त’ को दिन का सबसे पवित्र और शक्तिशाली समय माना गया है। अक्सर हमारे बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि सुबह के समय सोच-समझकर बोलना चाहिए क्योंकि उस वक्त मां सरस्वती जुबान पर बैठती हैं। लेकिन, इसके पीछे का असली तर्क और महत्व क्या है आइए समझते हैं।

क्या है ब्रह्म मुहूर्त का समय?
सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले का समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। आमतौर पर सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच का यह समय सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है। शास्त्रों के अनुसार, यह समय ‘देवताओं का समय’ होता है।

मां सरस्वती का वास और शब्दों की शक्ति
मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में मां सरस्वती हर व्यक्ति की जिह्वा (जुबान) पर कुछ क्षणों के लिए विराजती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस समय हम जो कुछ भी बोलते हैं या जो संकल्प लेते हैं, उनके सिद्ध होने की संभावना बहुत अधिक होती है।

प्राचीन विद्वानों का मानना है कि इस शांत समय में हमारे विचार और शब्द सीधे ब्रह्मांड से जुड़ते हैं। अगर हम इस समय सकारात्मक बातें करते हैं, अपने लक्ष्यों के बारे में सोचते हैं या प्रार्थना करते हैं, तो वह हमारी अंतरात्मा में गहराई से उतर जाती है और धीरे-धीरे हकीकत का रूप लेने लगती है।

ब्रह्म मुहूर्त में क्या करें और क्या न करें?
सकारात्मक बोलें: इस समय कभी भी अपशब्द, गुस्सा या नकारात्मक बातें न करें। स्वयं के लिए और दूसरों के लिए मंगल कामना करें।

संकल्प लें: अगर आप अपने जीवन में कुछ हासिल करना चाहते हैं, तो इस समय उसका मानसिक जाप करें।

मौन और ध्यान: अगर संभव हो तो इस समय मौन रहें और केवल ईश्वर या अपने लक्ष्यों का ध्यान करें।

पढ़ाई के लिए सर्वश्रेष्ठ: चूंकि मां सरस्वती ज्ञान की देवी हैं, इसलिए विद्यार्थियों के लिए इस समय की गई पढ़ाई सीधे दिमाग में बैठती है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
आध्यात्मिक रूप से यह समय सत्व गुण की प्रधानता का है। वहीं, विज्ञान कहता है कि सुबह के समय वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर सबसे अधिक और शोर सबसे कम होता है। इस वजह से हमारा मस्तिष्क (Brain) सबसे अधिक सक्रिय और ग्रहणशील होता है।

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