नये साल का नया गिफ्टः डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर नहीं लगेगी कोई फीस....

नये साल का नया गिफ्टः डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर नहीं लगेगी कोई फीस….

डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने आम जनता को नए साल का तोहफा दे दिया है। 1 जनवरी, 2018 से डेबिट कार्ड, भीम ऐप, यूपीआई से होने वाले ट्रांजेक्शन पर किसी तरह की कोई फीस नहीं लगेगी। इससे छोटे कारोबारियों के अलावा उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो डेबिट कार्ड से छोटे ट्रांजेक्शन करते हैं। नये साल का नया गिफ्टः डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर नहीं लगेगी कोई फीस....
2000 तक के ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा एमडीआर
डेबिट कार्ड स्वाइप कराने पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क को अगले 2 साल तक सरकार वहन करेगी। केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कैबिनेट बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार अपनी तरफ से बैंकों को इस शुल्क की भरपाई करेगी। इससे बैंकों के साथ-साथ आम लोगों पर भी किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। 

अप्रैल-सितंबर के बीच हुए 2.18 लाख करोड़ ट्रांजेक्शन
प्रसाद ने कहा कि इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच कुल मिलाकर के 2.18 लाख करोड़ ट्रांजेक्शन हुए हैं। जीएसटी के लागू होने के बाद डिजिटल इको सिस्टम को तैयार करने में काफी मदद मिलेगी। 

आरबीआई ने की थी दरें कम

देश में ज्यादा से ज्यादा लोग डेबिट कार्ड से खरीदारी कर सकें, इसके लिए बैंकिंग क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक ने इस पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को नए सिरे से तय किया है। अब 20 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारी को अधिकतम 0.40 फीसदी जबकि इससे ज्यादा का कारोबार करने वाले व्यापारी को 0.90 फीसदी से ज्यादा एमडीआर नहीं चुकाना होगा। यदि ट्रांजेक्शन क्विक रिस्पांस (क्यूआर) कोड पर आधारित होगा तो एमडीआर में और कमी होगी। यह आदेश आगामी एक जनवरी से लागू होगा।

एमडीआर को दूसरे शब्दों में ट्रांजेक्शन फीस भी कहते हैं जो कारोबारी पर लगता है। यह शुल्क कार्ड जारी करने वाली वित्तीय संस्था लेती हैं। बड़े दुकान, मॉल, होटल वगैरह इस फीस का बोझ खुद ही उठाते हैं, जबकि छोटे और मंझोले दुकानदार यह शुल्क ग्राहकों से वसूलते हैं।

रिजर्व बैंक द्वारा बुधवार को डेबिट कार्ड पर देय एमडीआर के बारे में जारी एक पत्र के मुताबिक नई व्यवस्था में ट्रांजेक्शन की रकम के बजाए व्यापारी के कुल कारोबार को एमडीआर का आधार बनाया गया है।

QR कोड के लिए भी अलग दरें
इसके साथ ही प्वाइंट ऑफ सेल्स यानी पॉस मशीन और क्विक रिस्पांस यानी क्यूआर कोड के लिए दरें अलग-अलग तय की गई है। इस व्यवस्था में बीते साल जिस कारोबारी ने 20 लाख रुपये तक का कारोबार किया होगा, उन्हें छोटा जबकि इस रकम से ज्यादा का कारोबार करने वालों को बड़ा व्यापारी माना गया है।

छोटे कारोबारी के लिए पॉस पर एमडीआर की दर 0.40 फीसदी तक हो सकती है। मतलब कि 1,000 रुपये की खरीद पर चार रुपये का एमडीआर। इस तरह के व्यापारी से खरीदारी पर ग्राहक को अधिकतम 200 रुपये का एमडीआर देना होगा। इनके यहां यदि क्यूआर कोड के आधार पर ट्रांजेक्शन होता है तो एमडीआर अधिकतम 0.30 फीसदी और ज्यादा से ज्यादा 200 रुपये ही हो सकता है।

बड़े कारोबारी के लिए एमडीआर की दर अधिकतम 0.90 फीसदी तक होगी। मतलब एक हजार रुपये के लेन-देन पर नौ रुपये का एमडीआर। क्यूआर कोड की सूरत में एमडीआर की दर 0.8 फीसदी होगी। दोनों ही स्थिति में एक ट्रांजेक्शन पर एमडीआर ज्यादा से ज्यादा 1,000 रुपये हो सकता है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर की यही दरें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए भी लागू होंगी।

1,000 रुपये से कम की खरीदारी पर बढ़ेगा शुल्क
अभी 1,000 रुपये के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर की दर 0.25 फीसदी है, यानी ज्यादा से ज्यादा ढाई रुपये। वहीं 1,000 रुपये से ज्यादा लेकिन 2,000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर की दर 0.5 फीसदी है। दोनों ही दरें छोटे-बड़े सभी कारोबारियों के लिए एक समान हैं।

2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर के लिए कोई सीमा तय नहीं है। एमडीआर में अधिकतम रकम की भी कैपिंग नहीं है। इसका आशय यह है कि नई व्यवस्था में 1,000 रुपये से कम की डेबिट कार्ड खरीदारी पर एमडीआर की दर ढाई रुपये से बढ़कर चार से नौ रुपये के बीच हो जाएगी।

 

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