अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की प्रस्तावित मुलाकात से पहले अमेरिका ने ताइवान को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और आगे भी ऐसा होने की उम्मीद नहीं है।
वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच ताइवान को लेकर लगातार बातचीत होती रही है। हाल की बैठकों में भी यह मुद्दा चर्चा का हिस्सा रहा, लेकिन इससे अमेरिका की आधिकारिक नीति में कोई बदलाव नहीं आया।
अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका आगे भी अपनी मौजूदा नीति पर कायम रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच संवाद जारी है।
ताइवान को हथियार बिक्री पर भी चर्चा
अमेरिकी अधिकारियों ने ताइवान को हथियार बिक्री का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने अपने पहले वर्ष में ताइवान को जितने हथियार सौदों की मंजूरी दी, वह पिछली सरकार के पूरे चार साल से ज्यादा थी।
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उन्होंने ताइवान के हालिया रक्षा बजट पर भी प्रतिक्रिया दी। अधिकारियों ने कहा कि पिछले सप्ताह ताइवान ने अतिरिक्त रक्षा बजट पारित किया, लेकिन उसमें कुछ जरूरी प्रस्ताव शामिल नहीं किए गए, जिससे अमेरिका निराश है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ताइवान की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए मूल रक्षा पैकेज के बाकी हिस्सों को भी मंजूरी मिलनी चाहिए।
ताइवान ने पारित किया अतिरिक्त रक्षा बजट
फोकस ताइवान की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान ने अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदने के लिए एक अतिरिक्त बजट विधेयक पारित किया है। इस योजना के तहत करीब 780 अरब ताइवानी डॉलर यानी लगभग 24.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक खर्च किए जा सकते हैं।
इधर, अमेरिका में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों ने मिलकर एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें ताइवान के खिलाफ चीन की बढ़ती धमकियों पर चिंता जताई गई है। यह प्रस्ताव ट्रंप और शी जिनपिंग की प्रस्तावित शिखर वार्ता से पहले लाया गया है।
अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति ने कहा कि यह प्रस्ताव चीन से पैदा हो रहे सुरक्षा और आर्थिक खतरों को लेकर दोनों दलों की साझा चिंता को दर्शाता है। प्रस्ताव को डेमोक्रेट सांसद जीन शाहीन और क्रिस कून्स के साथ रिपब्लिकन सांसद पीट रिकिट्स ने पेश किया है।
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