शेयर बाजार सपाट बंद: RBI के रेपो रेट फैसले पर टिकी निगाहें

गुरुवार को बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी ने अपने इंट्राडे निचले स्तरों से जोरदार रिकवरी की। इसे वैल्यू बाइंग और उन रिपोर्ट्स से सहारा मिला। इसके चलते भारतीय शेयर बाजार गुरुवार 4 जून को सपाट बंद हुए। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 13.84 अंक या 0.02 प्रतिशत ऊपर 74,360.01 के स्तर पर बंद हुआ और निफ्टी 10.95 अंक उछलकर 23,416.55 पर बंद हुआ। आज 2257 शेयरों में तेजी देखने को मिली और 932 शेयरों में गिरावट देखी गई और 172 शेयर अपरिवर्तित रहे।

दरअसल, एक रिपोर्ट के बाद बाजार के सेंटिमेंट को सहारा मिला, जिसमें कहा गया है कि सरकार सरकारी सिक्योरिटीज में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर टैक्स हटाने की योजना बना रही है। सरकार इस फैसले को लागू करने के लिए एक अध्यादेश ला सकती है। मार्केट की रिकवरी में यह बड़ा कारण रहा।

अब शेयर बाजार की चाल RBI के रेपो रेट के फैसले पर होगी। कल यानी 5 जून को RBI इस पर फैसले लेगा। तीन दिवसीय मौद्रिक नीति की बैठक चल रही है। कल के फैसले पर बाजार की चाल निर्भर करेगी।

क्या बोले एक्सपर्ट?
शुरुआती कारोबार में BSE सेंसेक्स 538.87 अंक या 0.72 प्रतिशत गिरकर 73,807.30 पर आ गया था। NSE निफ्टी 158.3 अंक या 0.67 प्रतिशत गिरकर 23,247.30 पर आ गया। हालांकि, दिन में बाद में निचले स्तरों पर खरीदारी में दिलचस्पी दिखी, जिससे बाज़ारों को उबरने में मदद मिली। सुबह करीब 11:30 बजे, सेंसेक्स 186.95 अंक या 0.25 प्रतिशत बढ़कर 74,533.12 पर था, जबकि निफ्टी 54.15 अंक या 0.23 प्रतिशत बढ़कर 23,459.75 पर पहुंच गया।

एनरिच मनी (Enrich Money) के CEO पोनमुडी आर ने कहा- “इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर समझौते के रिन्यूअल से क्षेत्रीय जोखिम भावना को कुछ राहत मिली है, लेकिन व्यापक चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी दुश्मनी, जिसमें हाल ही में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई की खबरें भी शामिल हैं, ने अनिश्चितता को बढ़ाए रखा है और वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता में किसी भी सार्थक सुधार को सीमित कर दिया है।”

रुपये पर क्या बोले एक्सपर्ट?
LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा- “रुपया लगभग 0.10% की मामूली गिरावट के साथ 95.77 के स्तर के आस-पास ट्रेड कर रहा था, क्योंकि कल आने वाले RBI के पॉलिसी फैसले से पहले बाजार सतर्क बने हुए थे। कमोडिटी की बढ़ी हुई कीमतों और FII के लगातार बाहर जाने (outflows) के कारण भारत का इंपोर्ट बिल दबाव में है। ऐसे में बाजार के प्रतिभागी महंगाई, करेंसी की स्थिरता और भविष्य की पॉलिसी दिशा के बारे में संकेत पाने के लिए गवर्नर की टिप्पणियों पर बारीकी से नजर रखेंगे। छोटी अवधि में रुपये की रेंज 95.25–96.25 के बीच रहने की उम्मीद है।”

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