जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में गुरुवार को प्रस्तावित छात्र मार्च को लेकर परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। जेएनयू छात्र संघ ने शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर बैरिकेडिंग कर दी और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की। पुलिस ने छात्रों को परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। परिसर छावनी में तब्दील दिखा। पुलिस ने गेट के पास उन्हें रोका, जिसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया है। वहीं, कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी सामने आई है।
पुलिस की सख्ती के बावजूद छात्र संघ के पदाधिकारियों ने वामपंथी छात्र संगठनों के अपने समर्थकों के साथ मुख्य द्वार से बाहर निकलने का प्रयास किया। इस प्रयास के दौरान जेएनयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार समेत कई छात्र बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने लगे, जिसके बाद करीब 40 छात्रों को हिरासत में ले लिया। इस मामले में पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार सभी 14 छात्रों को शुक्रवार को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपी पेशेवर या आदतन अपराधी नहीं हैं। अदालत ने आरोपियों को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्रों को जमानत का विरोध करते हुए उनकी न्यायिक हिरासत मांगी थी।
पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान करीब 25 पुलिसकर्मी घायल बताए जा रहे हैं। वहीं, छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) और जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग किया और बाद में 14 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार, मौजूदा अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका बाबू और संयुक्त सचिव दानिश अली के नाम शामिल है।
बता दें कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जय भीम, रोहित एक्ट लागू करो, वीसी मुर्दाबाद, जातिवादी वीसी को बर्खास्त करो और यूजीसी एक्ट लागू करो जैसे नारे लगाए। छात्रसंघ अध्यक्ष का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, लेकिन बिना वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें घसीटकर हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शन कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के कथित जातिवाचक बयान को लेकर किया जाना था। छात्र इस मुद्दे पर कार्रवाई और अपनी मांगों को शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाने के लिए मार्च करना चाहते थे। पुलिस का कहना है कि हालात ने बिगड़े इसलिए जब छात्रों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया तब उन्हें हिरासत में लिया गया। कैंपस में अभी भी पुलिस बल तैनात हैं।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal