इजरायल और हिजबुल्लाह समूह के बीच संघर्ष-विराम को तीन हफ्ते के लिए बढ़ाने पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान कहा कि, इजरायल और लेबनान के राजदूतों के बीच हुई बैठक में इसका निर्णय लिया गया है।
मालूम हो कि, पिछले एक हफ्ते में यह दूसरी बैठक थी। वहीं, पिछले शुक्रवार को जब से शुरुआती संघर्ष-विराम लागू हुआ है, तब से दोनों पक्षों की ओर से कई बार इसका उल्लंघन किया गया। इसके अलाव ट्रंप ने ओवल ऑफिस में एक सभा के दौरान माना कि “उन्हें हिजबुल्लाह समूह के बारे में भी सोचना होगा। इसीलिए उम्मीद है कि, अगले कुछ हफ्तों में वॉशिंगटन में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ आउन से मुलाकात करेंगे।
दशकों बाद इजरायल और लेबनान के बीच हुई सीधी बातचीत
बता दें कि, दो दशकों बाद इजरायल और लेबनान के बीच पहली सीधी कूटनीतिक बातचीत हुई। 1948 में इजरायल के बनने के बाद से आधिकारिक तौर पर युद्ध की स्थिति में ही दोनों देश रहे हैं। शुरुआती 10 दिनों का संघर्ष-विराम सोमवार को खत्म होने वाला था।
वहीं, लेबनानी राजदूत नाडा हमादेह मोवाड ने ट्रंप का धन्यवाद किया। उन्होंने ट्रंप के नारा “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” (अमेरिका को फिर से महान बनाओ) का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि आपकी मदद और आपके समर्थन से, हम लेबनान को भी फिर से महान बना सकते हैं।”
लेबनानी राष्ट्रपति आउन ने एक दिन पहले कहा था कि, भविष्य की बातचीत का मकसद इजरायली हमलों को पूरी तरह रोकना, लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी, इजरायल में बंद लेबनानी कैदियों की रिहाई, सीमा पर लेबनानी सैनिकों की तैनाती और दोबारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू करना है।
हमारी लड़ाई हिजबुल्लाह से है : विदेश मंत्री गिदोन सार
इसके साथ ही इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने लेबनान से अपील की है कि, वह हिजबुल्लाह को निहत्था करने के लिए इजरायल के साथ मिलकर काम करे। सार ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इजरायल के राजदूतों और राजनयिकों को संबोधित करते हुए कहा, “लेबनान के साथ हमारा कोई गंभीर मतभेद नहीं हैं। सीमा से जुड़े कुछ छोटे-मोटे विवाद हैं, जिन्हें सुलझाया जा सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “दोनों देशों के बीच शांति और सामान्य संबंधों में सिर्फ एक ही रुकावट है, हिजबुल्लाह।” इजरायल की सेना ने दक्षिणी लेबनान में 6 मील (10 किलोमीटर) तक फैले एक बफर ज़ोन पर कब्ज़ा कर रखा है। इजरायल का कहना है कि, उसका मकसद उत्तरी इजरायल की ओर दागे जाने वाले कम दूरी के रॉकेटों और टैंक-रोधी मिसाइलों के खतरे को खत्म करना है।
हालांकि, हिजबुल्लाह इस कूटनीतिक बातचीत में शामिल नहीं रहा है। इस संगठन की राजनीतिक परिषद के एक वरिष्ठ सदस्य, वफीक सफा ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि सीधी बातचीत के दौरान होने वाले किसी भी समझौते को वे नहीं मानेंगे।
इन सब के बीच लेबनान की सरकार को उम्मीद है कि इस बातचीत से जंग को हमेशा के लिए खत्म करने का रास्ता निकलेगा। जहां एक तरफ ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए लेबनान और इस पूरे क्षेत्र में चल रही जंग को खत्म करने की शर्त रखी है, वहीं लेबनान इस बात पर अड़ा है कि वह अपना प्रतिनिधित्व खुद करेगा। पिछले हफ्ते हुई बातचीत, 1993 के बाद से इजरायल और लेबनान के बीच पहली सीधी बातचीत थी।
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