अब तक 21 को फांसी और 4000 से ज्यादा गिरफ्तार… अमेरिका से युद्ध के बाद ईरान में बदतर हालात

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में हालात और सख्त हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान कम से कम 21 लोगों को फांसी दी गई है और 4000 से ज्यादा लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है।

तुर्क के अनुसार, इनमें से 9 लोगों को जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में, 10 लोगों को विपक्षी संगठनों से संबंध के आरोप में और 2 लोगों को जासूसी के आरोप में मौत की सजा दी गई। उन्होंने कहा कि युद्ध के असर के बीच ईरान में लोगों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है।

UN ने जताई चिंता

वोल्कर तुर्क ने ईरानी सरकार से सभी फांसी पर रोक लगाने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को बिना ठोस आधार के हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। तुर्क ने आरोप लगाया कि कई गिरफ्तार लोगों के साथ जबरन गायब करना, यातना देना और जबरन कबूलनामे करवाने जैसे मामले सामने आए हैं।

जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई थी, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़ा आंदोलन माना गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि युद्ध के दौरान भी सरकार ने विरोधियों पर कार्रवाई जारी रखी है। वहीं, ईरान ने पहले इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक बताया था।

अल्पसंख्यकों पर ज्यादा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। कई कैदियों को अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है, जिनमें मानवाधिकार वकील नसरीन सोतूदेह भी शामिल हैं। इसके अलावा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की तबीयत भी खराब बताई जा रही है।

जेलों में हिंसा के आरोप

तुर्क ने बताया कि चाबहार जेल में विरोध के दौरान सुरक्षा बलों ने कम से कम 5 लोगों को मार दिया और 21 को घायल कर दिया। एक अन्य जेल में दो कैदियों की हिरासत में मौत हो गई, जिनके साथ यातना के संकेत मिले हैं।

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