Sunday , 29 May 2022

भारत में फिर ‘पोलियो’ की दस्तक?

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l_polioएजेंसी/ नई दिल्ली। तेलंगाना में सिंकदराबाद शहर के रेलवे स्टेशन के पास सीवर में पोलियों के विषाणु पाए जाने की खबरों के बीच सरकार की ओर से बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि इससे भारत की वाइल्ड पोलियो विषाणु से मुक्त होने की छवि प्रभावित नहीं होगी। 

कम खतरनाक वायरस मिला

स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सिंकदराबाद में पोलियों के जो विषाणु पाया गया है वह वाइल्ड पेालियो का नहीं बल्कि वैक्सीन डेराइवड पोलियो का है जो अपेक्षाकृत कम खतरनाक होता है फिर भी एहतियात बरतते हुए रंगरेड्डी जिले और सिंकदराबाद में 20 जून से व्यापक पोलियो टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान तीन लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। 

घर-घर जाकर दवा नहीं पिलाई जाएगी 

मंत्रालय ने सिंकदराबाद की घटना को लेकर चिंतित नहीं होने की सलाह देते हुए कहा है कि इलाके में बच्चों के लिए प्रभावी टीकाकरण अभियान बहुत पहले ही चलाया जा चुका है जिससे उनमें पोलियो के प्रति प्रतिरोधक क्षमता काफी विकसित हो चुकी है फिर भी सरकार कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती और फिर से पोलियो टीकाकरण अभियान चला कर इसके संक्रमण की सारी गुजांइशें खत्म कर देना चाहती है। इसके लिए घर-घर जाकर दवा नहीं पिलाई जाएगी बल्कि बच्चों के अभिभावकों को टीकाकरण केन्द्र आने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 

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2014 में पोलिया फ्री हुआ था भारत

भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) की ओर से मार्च 2014 में पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया गया था। यह प्रमाण पत्र वाइल्ड पोलियो के निराकरण पर दिया जाता है। सरकार का कहना है कि वाइल्ड पेालियो देश से बहुत पहले खत्म हो चुका है पिदले पांच सालों में इसका एक भी मामला सामने नहीं आया है। सिंकदराबाद शहर में वैक्सीन डेराइव्ड पोलियो के विषाणु शहर के सबसे बड़े नाले अंबेरपेट में पाए गए हैं। 

पोलिया की दवा ही होती है विषाणु का स्रोत

डब्ल्यू एच ओ की टीम ने अप्रैल में पोलियो विषाणुओं की जांच के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से गंदे पानी के 30 नमूने लिए थे जिनमें से सिंकदराबाद से लिए नमूने में यह विषाणु पाया गया था। इस किस्म के विषाणु का स्रोत खास परिस्थितियों में खुद पोलिया की दवा ही होती है। दवा पीने वाले बच्चे के मल से निकलकर कमजोर पड़े ये विषाणु गंदे पानी में मिल जाते हैं और फिर कुछ खास परिस्थितियों में फिर से सक्रिय होकर संक्रमण का खतरा पैदा करते हैं।

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