राज्य सरकार इस संबंध में सोमवार से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में बिल ला सकती है। इस प्रस्तावित बिल के अनुसार, ड्यूटी के दौरान यदि नौकरशाहों के खिलाफ कोई शिकायत है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी है, तो उसके लिए पहले राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी। इस बिल में 180 दिन की समयावधि भी रखी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में आरोपी का नाम सरकार की अनुमति के बाद ही आ सकता है। इस बिल में 180 दिन की समयावधि भी रखी गई है। इसके अनुसार शिकायत होने के बाद सरकारी कर्मचारी या अन्य लोगों के खिलाफ सरकार 180 दिन में निर्णय लेगी। तय समयावधि के बाद अगर कोई निर्णय नहीं आता है, तो सबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोर्ट के जरिए ही रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है।
उधर, राजस्थान के पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने सफाई दी है कि नौकरशाहों के खिलाफ इस्तगासे के जरिए झूठी शिकायतों की बाढ़ आ गई है, जिससे नौकरशाह विकास के काम नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि इस बिल का मुख्य मकसद नौकरशाहों को बदनाम करने से रोकना है न कि मीडिया पर सेंसरशिप लगाना।
इधर, गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि ईमानदार अधिकारी काम करने से डरते हैं कि कोई उन्हें केस में न फंसा दे। साफ छवि के अधिकारियों को बचाने के लिए ये बिल लाया जा रहा है।
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