नई दिल्ली. प्रख्यात संगीतकार इलैयाराजा, हिंदूवादी विचारक परमेश्वरन परमेश्वरन, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी समेत 85 लोगों को साल 2018 का प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार दिए जाएंगे. पुरस्कार पाने वालों में 16 विदेशी, अप्रवासी भारतीय शामिल हैं जबकि तीन को यह सम्मान मरणोपरांत दिया जाएगा. संगीतकार 74 वर्षीय इलैयाराजा को 2009 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. इस बार उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा जाएगा जो भारत रत्न के बाद दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है.
उनके अलावा हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक गुलाम मुस्तफा खान, केरल के परमेश्वरन परमेश्वरन, जो विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अध्यक्ष हैं, को पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, बिलियर्ड खिलाड़ी पंकज आडवाणी, भारत में रूस के पूर्व राजदूत दिवंगत एलेक्जेंडर कादाकिन, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीतज्ञ अरविंद पारिख, तमिलनाडु के पुरातत्ववेत्ता रामचंद्रन नागस्वामी और गोवा के कलाकार लक्ष्मण पई उन नौ दिग्गज हस्तियों में शामिल हैं जिन्हें पद्म भूषण से नवाजा जाएगा.
गुमनाम नायकों को सम्मानित करने के अपने वादे को पूरा करते हुए सरकार ने गरीबों की सेवा करने वालों, मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूल खोलने वालों और जनजातीय कलाओं को वैश्विक रूप से लोकप्रिय बनाने वाली शख्सियतों को ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की. पद्म पुरस्कार पाने वालों में केरल की आदिवासी महिला लक्ष्मीकुट्टी भी शामिल हैं जिन्होंने स्मरण से 500 हर्बल औषधि तैयार की और खासतौर पर सर्पदंश एवं कीटों के डंक के मामलों में हजारों लोगों की मदद की.
वह केरल फोल्कलोर एकेडमी में पढ़ाती हैं और एक जंगल में स्थित एक आदिवासी बस्ती में पत्तों से बनी छत वाली एक छोटी सी झोपड़ी में रहती हैं. वह अपने इलाके से एक मात्र ऐसी आदिवासी महिला हैं जिन्होंने 1950 के दशक में स्कूली शिक्षा हासिल की थी. छात्रों की कई पीढ़ियों को विज्ञान सीखने के लिए प्रेरित करने वाले आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र अरविंद गुप्ता को भी पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा.
गुप्ता चार दशकों में 3000 स्कूलों में गए, खिलौना बनाने पर 18 भाषाओं में 6200 लघु फिल्में बनाई और 1980 के दशक में लोकप्रिय टीवी शो ‘तरंग’ की भी मेजबानी की. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त गोंड कलाकार भज्जू श्याम को भी पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. गोंड पेंटिंग के जरिए यूरोप का चित्रण करने को लेकर श्याम प्रसिद्ध हुए. यह मध्य प्रदेश की आदिवासी शैली की एक कला है. उनकी ‘ द लंदन जंगल बुक’ की 30,000 प्रतियां बिकीं और इसका पांच विदेशी भाषाओं में प्रकाशन हुआ.
पश्चिम बंगाल निवासी और 99 वर्षीय स्वतंत्रत संग्राम सेनानी सुधांशु विश्वास भी पुरस्कार पाने वालों में शामिल हैं. उन्होंने गरीबों की सेवा की, स्कूल और अनाथालय चलाए और गरीबों को मुफ्त शिक्षा देने के लिए स्कूल खोला. केरल के मेडिकल मसीहा एमआर राजागोपाल को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. भारत के प्रथम पैरा-ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता एवं महाराष्ट्र के मुरलीकांत पेटकर को भी पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. 1965 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने अपनी बांह गंवा दी थी.
‘प्लास्टिक रोड मेकर‘ (प्लास्टिक से सड़के बनाने वाले) के रूप में देश में पहचाने जाने वाले तमिलनाडु के राजगोपालन वासुदेवन को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. उन्होंने सड़क निर्माण के लिए प्लास्टिक कूड़े के पुन: उपयोग का एक नवोन्मेषी तरीका ईजाद किया. पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाके से आने वाली गरीब महिला सुभाषिणी मिस्त्री का नाम भी यह पुरस्कार पाने वालों में शामिल हैं. उन्होंने राज्य में गरीबों के लिए एक अस्पताल बनाने के लिए 20 साल तक घरेलू सहायिका और दिहाड़ी मजदूर के तौर पर मेहनत की.
वयोवृद्ध कृषि मजदूर सुलगत्ती नरसम्मा को भी पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. उन्होंने बगैर किसी मेडिकल सुविधा के कर्नाटक के पिछड़े क्षेत्रों में प्रसव सहायिका के तौर पर सेवाएं दी. तमिल लोक संगीत और आदिवासी संगीत के संग्रह, दस्तावेजीकरण और संरक्षण में अपना जीवन समर्पित करने वाली विजयलक्ष्मी नवनीतकृष्णन को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. तिब्बती हर्बल औषधि के चिकित्सक येशी धोदेन का नाम भी यह पुरस्कार पाने वालों में शामिल हैं. वह हिमाचल प्रदेश के दूर दराज के इलाकों में सेवाएं दे रहे हैं.