
इसमें मीडिया एवं सामाजिक संगठनों की महिलाएं शामिल हैं। यह समिति महिला छात्रावासों में जाकर छात्राओं की समस्याओं को सुनती है, एवं उनका निस्तारण करती है। इसमें छात्रावास स्तर पर छात्राओं के प्रतिनिधि को भी शामिल किये जाने का निर्णय किया गया है।
बताया कि मुख्य द्वार सहित अन्य जगहों पर सीसीटीवी कैमरा लगवाया जा रहा है। महिला सुरक्षाकर्मियों की भी तैनाती की जा रही है। कैंपस में जहां स्ट्रीट लाईट खराब थी उन्हें ठीक कर दिया गया है।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर हेतु एक सुव्यवस्थित सुरक्षा योजना बनाई जा रही है जिसमें सुझाव हेतु वरिष्ठ छात्राओं को भी शामिल किया जायेगा। इस दौरान कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी, कार्यवाहक चीफ प्राकटर और छात्र अधिष्ठाता प्रो.एमके सिंह आदि लोग मौजूद थे।
चक्रपाणि ओझा, भूपेंद्र के देखरेख में चल रहे धरने में कार्यकर्ताओं ले ने घटनाओं के बारे में फैक्ट फाइडिंग कमेटी का गठन, न्यायिक जांच आयोग गठन, चीफ प्राक्टर, प्राक्टोरियल बोर्ड को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के साथ ही महिला छात्रावासों सहित परिसर में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित किया करने की मांग की थी।
इसके अलावा परिसर में सीसीटीवी, रास्तों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की बात भी रखी थी। हालांकि कुलसचिव की ओर से जो पत्र दिया गया है, उसमें पूर्व में परिषद की ओर से 8 सितंबर को दिए गए ज्ञापन के साथ ही घटना के बाद दिए जाने वाले मांग पत्र का भी जिक्र है।
शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि अधिकार छिनने की तारीख से दो दिन पहले 25 सितंबर को सलेक्शन कमेटी बुलाना और एक दिन पहले 26 सितंबर को दिल्ली में कार्यपरिषद की बैठक बुलाना यह साबित करता है कि कुलपति छात्राओं पर लाठीचार्ज, जुल्म से दुखी नहीं हैं।
वे सभी छात्राएं सकुशल अपने घर पहुंच गई है कि नहीं, उनकी चोट कैसी है, इन बातों से उनका कोई मतलब नहीं है। उन्हें किसी प्रकार की संवेदना नहीं है। आरोप लगाया कि किसी भी छात्रा का हाल जानने के बजाय अपने चेहतों को नौकरी देने की चिंता अधिक सता रही थी।
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