परिणीति ने यश राज फिल्म्स के बैनर के साथ मैनेजर के तौर पर काम किया। उन्होंने ‘दिल बोले हड़िप्पा’, ‘रॉकेट सिंह’, ‘बदमाश कंपनी’, ‘लफंगे परिंदे’ और ‘बैंड बाजा बारात’ जैसी सफल फिल्मों में मैनेजमेंट का काम संभाला। परिणीति ने ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’ से फिल्मों में डेब्यू किया। सह-अभिनेत्री के तौर पर उनकी अदाकारी काफी सराही गई। इसके बाद अगली ही फिल्म ‘इश्कजादे’ में परिणीति बतौर हीरोइन अर्जुन कपूर के साथ नजर आई।
‘इश्कजादे’ के बाद परिणीति के हिस्से में काफी अच्छी फिल्में आईं। शुद्ध देसी रोमांस’ (2013) और ‘हंसी तो फंसी’ (2014) फिल्मों में परिणीति के काम को काफी सराहा। बहुत कम लोग जानते हैं कि परिणीति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रखी है। परिणीति ने आज अपनी एक अलग पहचान बना ली है। एक बार सानिया मिर्जा ने कहा था कि अगर उनकी जीवनी पर कोई फिल्म बनाई जाए तो वह परिणीति को ‘सानिया’ के तौर पर पर्दे पर देखना पसंद करेंगी।
आखिर परिणीति को भी ये एहसास दिला दिया गया कि वो फिल्मों के हिसाब से मोटी हैं। आखिर परिणीति ने ठान लिया कि वो एकदम स्लिम-ट्रिम होकर रहेंगी। परिणीति ने खुद को फिट करने के लिए देश तक छोड़ दिया। दरअसल परिणीति ने पिछले साल डेटॉक्स प्रोग्राम को फॉलो किया ये वजन कम करने की एक विधि है। जो ऑस्ट्रिया में की जाती है। इसमें कोई सर्जरी नहीं की जाती। इस डेटॉक्स प्रक्रिया में कई टेस्ट किए जाते हैं।
वो काफी हद पहले से पतली भी दिख रही हैं। परिणीति ने कहा कि अगर मैं किसी ओर पेशे में होती तो मुझे ये सब करने की जरूरत नहीं थी। ये फिक्र करने की जरूरत नहीं थी कि क्या खाया जाए क्या नहीं। लेकिन फिल्मों में एक दबाव होता है। आपको खुद को फिट रखना होता है। परिणीति के अनुसार जब फिल्मों में होते हैं, तो रोजाना आपको अपने शरीर को देखते हैं। आप अपनी मोटी बांह और पेट देखते हैं, तो ये आपको परेशान करते हैं।