गिरने या हल्की-सी चोट लगने पर शरीर पर नील पड़ जाना एक बहुत ही आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के आपके शरीर पर बार-बार नील पड़ रहे हैं?
या फिर मामूली-सी चोट लगने के बाद भी आपके जोड़ों में बार-बार सूजन और दर्द रहने लगा है? डॉ. उर्मी शेठ (कंसल्टेंट क्लिनिकल हेमेटोलॉजिस्ट, इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, पुणे) का कहना है कि अगर ऐसा है, तो इसे नॉर्मल मानकर अनदेखा न करें। यह ‘हीमोफीलिया’ जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। आइए, डिटेल में जानते हैं इस बारे में।
हीमोफीलिया क्या है और इसके लक्षण कैसे होते हैं?
हीमोफीलिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में खून का थक्का ठीक से नहीं बन पाता है। इसका मुख्य कारण खून में जरूरी ‘क्लॉटिंग फैक्टर्स’ की कमी होना है।
ज्यादातर लोगों को लगता है कि हीमोफीलिया का मतलब सिर्फ कटने पर खून का न रुकना है, लेकिन ऐसा नहीं है। खासकर बच्चों और युवाओं में इसके कुछ शुरुआती और प्रमुख लक्षण इस प्रकार देखे जाते हैं:
बार-बार नील पड़ना: बिना किसी वजह या हल्की चोट पर ही शरीर पर नीले निशान उभर आना।
जोड़ों में समस्या: घुटनों, टखनों और कोहनियों में दर्द और सूजन होना।
दांतों के इलाज के बाद: लंबे समय तक खून बहते रहना।
नाक से खून आना: बार-बार नकसीर फूटना।
जोड़ों के लिए क्यों है यह खतरनाक?
डॉक्टर का कहना है कि कई बार हीमोफीलिया के कारण शरीर के अंदर ही अंदर, विशेषकर जोड़ों में खून जमा होने लगता है। शुरुआत में यह हल्के दर्द, जकड़न, उस हिस्से के गर्म होने या चलने-फिरने में होने वाली परेशानी के रूप में सामने आता है। अगर समय पर इसका सही इलाज न किया जाए, तो यह लगातार दर्द का कारण बन सकता है और हमेशा के लिए जोड़ों को खराब कर सकता है, जिससे चलने-फिरने में स्थायी दिक्कत आ सकती है।
क्या हर बार नील पड़ना हीमोफीलिया है?
बिल्कुल नहीं! यह जानना बहुत जरूरी है कि हर बार नील पड़ना या जोड़ों में दर्द होना हीमोफीलिया का ही लक्षण नहीं होता। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे:
प्लेटलेट्स से जुड़ी कोई समस्या
शरीर में विटामिन्स की कमी
लिवर से संबंधित बीमारियां
वॉन विलेब्रांड रोग
कुछ खास दवाओं के साइड इफेक्ट्स
जोड़ों की सूजन से जुड़ी अन्य बीमारियां
इसलिए, इंटरनेट पर पढ़कर या लक्षणों को देखकर बिना किसी जांच के खुद से कोई भी निष्कर्ष निकालना बिल्कुल गलत है।
कैसे होती है इस बीमारी की सही पहचान?
सही बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर द्वारा पूरी जांच होना बहुत जरूरी है। एक सटीक डायग्नोस तक पहुंचने के लिए डॉक्टर इन चीजों पर ध्यान देते हैं:
मेडिकल और फैमिली हिस्ट्री: मरीज की पुरानी बीमारियां और यह जानना कि परिवार में पहले किसी को यह बीमारी थी या नहीं।
शारीरिक परीक्षण: मरीज की स्थिति की बारीकी से जांच करना।
खून की जांच: इसमें मुख्य रूप से ‘कोएगुलेशन प्रोफाइल’ और क्लॉटिंग फैक्टर की जांच की जाती है। इससे डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि खून में ‘फैक्टर VIII’ या ‘फैक्टर IX’ की कमी है या नहीं, और अगर है तो बीमारी कितनी गंभीर स्थिति में है।
याद रखने वाली बात
सबसे जरूरी बात यह है कि अगर आपको या आपके किसी जानने वाले को बार-बार बिना कारण नील पड़ने, मामूली चोट पर जोड़ों में सूजन आने, बार-बार नाक से खून आने या चोट लगने पर ज्यादा देर तक खून बहने जैसी समस्या हो रही है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।
ऐसे में, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज से हीमोफीलिया को बहुत ही बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे मरीज एक सामान्य जीवन जी सकता है।
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