ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने बताया क्यों नहीं बनी बात?

 ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोमवार (13 अप्रैल) को कहा कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बस कुछ इंच ही दूर थी, तभी उन्हें अत्यधिक मांगों, बदलते लक्ष्यों और नाकेबंदी का सामना करना पड़ा।

अराघची की यह टिप्पणी दोनों पक्षों की उस मुलाकात के एक दिन बाद आई है, जो बीते दिनों पाकिस्तान में पश्चिम एशिया युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समाधान खोजने के उद्देश्य से मिले थे, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इससे कई लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि इस उच्च-स्तरीय वार्ता में असल में हुआ क्या था?

‘नेक इराके के साथ की थी बातचीत’

अराघची ने कहा कि ईरान ने लगभग 50 वर्षों में दोनों देशों के बीच हुई अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय वार्ता में युद्ध को समाप्त करने के नेक इरादे से अमेरिका के साथ बातचीत की। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि असल में ऐसा क्या हुआ था जिसने लगभग पूरी हो चुकी इस सहमति में बाधा डाली।

अराघची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गहन बातचीत में ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ सद्भावना से बातचीत की। लेकिन जब हम ‘इस्लामाबाद MoU’ से बस कुछ ही इंच दूर थे तो हमें अत्यधिक मांगों, बदलते लक्ष्यों और रुकावटों का सामना करना पड़ा। इससे कोई सबक नहीं सीखा गया।”

‘अमेरिका पर नहीं था भरोसा’

उन्होंने आगे कहा, “सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है। शत्रुता से शत्रुता पैदा होती है।” अराघची की टिप्पणियों से कुछ घंटे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी संकेत दिया था कि अभी भी कोई समझौता हो सकता है, लेकिन उन्होंने अमेरिका से अपनी तानाशाही छोड़ने और ईरान के अधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया।

पाकिस्तान में ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले ईरानी संसद के स्पीकर एमके गालिबफ ने भी यही कहा कि ईरान ने एक समझौता करने की इच्छा के साथ बातचीत शुरू की थी, लेकिन उसे दूसरी तरफ पर भरोसा नहीं था।

उन्होंने कहा, “ईरानी प्रतिनिधिमंडल में मेरे सहयोगियों ने भविष्य-उन्मुखी पहलें सामने रखीं, लेकिन बातचीत के इस दौर में विरोधी पक्ष अंततः ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में नाकाम रहा।”

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