चंडीगढ़ : पंजाब के सरकारी अस्पतालों में आईसीयू सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि प्रदेश के हर जिले में डॉक्टरों की नियुक्ति, स्वीकृत पदों और खाली पदों की वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड पर लाई जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत सामने आ सके।
सरकार ने पेश किया अस्पतालों का ब्योरा
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि राज्य के कई जिला अस्पतालों में आईसीयू सुविधाएं मौजूद हैं। सरकार के अनुसार जालंधर जिला अस्पताल में 24 आईसीयू बेड पूरी तरह कार्यरत हैं। मोहाली में 15 और पटियाला में 14 समर्पित आईसीयू बेड उपलब्ध हैं। होशियारपुर जिला अस्पताल में फिलहाल दो आईसीयू बेड काम कर रहे हैं। वहीं अमृतसर में 12 आईसीयू बेड हैं, जिनमें से छह को हाई डिपेंडेंसी यूनिट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
22 जिलों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक का दावा
राज्य सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत पंजाब के 22 जिलों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाए जा रहे हैं, जहां आधुनिक आईसीयू सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनका उद्देश्य आपात स्थिति, महामारी और आपदा के समय बेहतर इलाज मुहैया कराना है। हालांकि कोर्ट के सवाल पर सरकार यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि इन परियोजनाओं का काम किस चरण में है।
मालेरकोटला अस्पताल पर खास फोकस
सुनवाई के दौरान मालेरकोटला जिले में आईसीयू की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सरकार ने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 15 स्वीकृत पद हैं। पहले सभी पद भरे हुए थे, लेकिन तबादलों के चलते इस समय पांच पद खाली हो गए हैं।
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