क्या बिना किसी लक्षण के शरीर में बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल? 

हाई कोलेस्ट्रॉल एक साइलेंट किलर है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, जिससे समस्या गंभीर होने तक इसका पता नहीं चलता। यह ब्लड वेसल्स में प्लाक जमा कर उन्हें संकरा कर देता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट अटैक और दिल की बीमारियों का बड़ा कारण हाई कोलेस्ट्रॉल है, लेकिन अक्सर इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। यह नाम इसे इसलिए मिला है, क्योंकि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के संकेत तब तक सामने नहीं आते जब तक स्थिति बहुत गंभीर न हो जाए।

ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कैसे वक्त रहते कोलेस्ट्रॉल का पता लगा सकते हैं और यह कैसे साइलेंट किलर बन जाता है। आइए जानें इन सवालों के जवाब।

क्यों खतरनाक है कोलेस्ट्रॉल?
कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा पदार्थ होता है जो हमारे ब्लड में पाया जाता है। शरीर को कुछ मात्रा में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) की जरूरत होती है, लेकिन अगर बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह आर्टरीज में जमा होने लगता है।

क्या बढ़ते कोलेस्ट्रॉल के लक्षण दिखते हैं?
इसका सीधा जवाब है, नहीं। आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल का कोई लक्षण नहीं होते। व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर सकता है, जबकि उसकी आर्टरीज के अंदर धीरे-धीरे प्लाक जमा होता रहता है। हालांकि, जब स्थिति काफी बढ़ जाती है, तो शरीर कुछ संकेत दे सकता है, जैसे-

हाथ-पैरों में झुनझुनी- नसों में ब्लड फ्लो बाधित होने के कारण हाथ-पैरों में सुन्नता महसूस हो सकती है।
त्वचा पर पीले निशान- कुछ लोगों की आंखों के कोनों या पलकों पर पीले रंग के छोटे चकत्ते दिखने लगते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के जमाव का संकेत हैं।
सांस फूलना या थकान- दिल तक सही मात्रा में ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण मामूली काम में भी थकान होने लगती है।
सीने में बेचैनी- अगर आर्टरीज ज्यादा ब्लॉक हो जाएं, तो सीने में दर्द की समस्या हो सकती है।

यह साइलेंट किलर कैसे बनता है?
कोलेस्ट्रॉल शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचा सकता है, जैसे-
प्लाक जमना- जब ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होती है, तो यह आर्टरीज की दीवारों पर चिपकने लगता है। समय के साथ यह सख्त होकर प्लाक बन जाता है।
आर्टरीज संकरी होना- जैसे-जैसे प्लाक बढ़ता है, आर्टरीज संकरी और सख्त हो जाती हैं। इससे ब्लड फ्लो के लिए कम जगह मिलती है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट- यह प्रक्रिया सालों तक बिना किसी दर्द के चलती रहती है। शरीर इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करता है, इसलिए मरीज को कुछ महसूस नहीं होता।
हार्ट अटैक या स्ट्रोक- जब आर्टरीज पूरी तरह बंद हो जाती है या ब्लड फ्लो के लिए बहुत कम रास्ता बचता है, तो यह हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बनता है।

कैसे लगाएं पता?
क्योंकि इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए एकमात्र रास्ता नियमित लिपिड प्रोफाइल टेस्ट है, खासकर अगर आपके परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा है। इसके अलावा-

सैचुरेटेड और ट्रांस फैट से बचें। ओमेगा-3 और फाइबर से भरपूर डाइट लें।
एक्सरसाइज गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करती है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार है।
बढ़ता वजन सीधे तौर पर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करता है। इसलिए सही वजन मेंटेन करने की कोशिश करें।

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