भागलपुर में एक धार्मिक स्थल से जुड़ा पुराना भूमि विवाद दोबारा चर्चा में है। दान की गई जमीन को लेकर स्थानीय लोगों में असुरक्षा और आक्रोश है। पहले हुए हिंसक घटनाक्रम की यादें फिर ताजा हो गई हैं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल है।
वर्षों से चले आ रहे उर्दू बाजार स्थित काली मंदिर की जमीन के विवाद ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। दान में मिली मंदिर की जमीन पर भूमाफियाओं की गिद्ध नजर दोबारा पड़ने से इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। इसी को लेकर सोमवार को मुहल्ले के सैकड़ों लोग मंदिर की जमीन बचाने की मांग को लेकर तातारपुर थाना पहुंचे और वहां मौजूद अधिकारियों से हस्तक्षेप कर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की गुहार लगाई।
दरअसल पूरा मामला भागलपुर जिले के तातारपुर थाना क्षेत्र के उर्दू बाजार स्थित काली मंदिर से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर की जमीन के संरक्षण के लिए पूर्व में पूजा समिति के अध्यक्ष रहे धूरी यादव को अपनी जान तक गंवानी पड़ी थी। आरोप है कि भूमाफियाओं ने मंदिर की जमीन हड़पने के इरादे से पूर्व अध्यक्ष धूरी यादव की हत्या कर दी थी। अब एक बार फिर उसी तरह की स्थिति उत्पन्न हो जाने से मुहल्ले के लोग भय और असमंजस में हैं।
स्थानीय लोगों और चार दशक पूर्व के पूजा समिति अध्यक्ष का कहना है कि कंठी देवी द्वारा काली मंदिर को यह जमीन दान में दी गई थी। लेकिन मंदिर की यह बेशकीमती जमीन कुछ लोगों की आंखों में खटक रही है। आरोप है कि जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर मुहल्ले के लोगों को भी पूर्व अध्यक्ष की तरह जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुहल्लेवासियों ने सामूहिक रूप से थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस पर अंचल अधिकारी की मौजूदगी में अमीन से मंदिर की जमीन की मापी कराए जाने का आश्वासन दिया गया है। फिलहाल डेढ़ कट्ठा दान की इस जमीन को लेकर विवाद फिर से गहराता नजर आ रहा है, जिसे लेकर भविष्य में खूनी संघर्ष की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
ऐसे में प्रशासनिक अमले के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह समय रहते हस्तक्षेप कर इस विवाद का स्थायी समाधान निकाले। अन्यथा यह जमीनी विवाद आने वाले समय में भागलपुर प्रशासन के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।
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