हजारों किलोमीटर की कठिन राह, बदलते मौसम, अनगिनत चुनौतियां- लेकिन हौसले बुलंद हों तो हर मंजिल करीब लगती है।
इसी जज्बे की जीती-जागती मिसाल बनकर उभरी हैं आशा मालवीय, जिन्होंने अपनी साइकिल यात्रा के जरिए नारी शक्ति, देशभक्ति और अदम्य साहस का ऐसा संदेश दिया है, जिसने युवाओं के दिलों में नई ऊर्जा भर दी है।
78वें भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर की एथलीट, पर्वतारोही व साइक्लिस्ट आशा मालवीय ने 11 जनवरी 2026 को राजस्थान के जयपुर से 7,800 किलोमीटर लंबी देशव्यापी पूर्व-पश्चिम एकल साइकिल अभियान (यात्रा) की शुरुआत की थीं।
इस सफर में वह राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड को पार करते हुए करीब 5,700 किलोमीटर की दूरी तय कर कोलकाता पहुंचीं, जहां गुरुवार को एनसीसी कैडेटों व अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
7,800 किलोमीटर में से अब तक वह लगभग 5,700 किमी की दूरी तय कर चुकी हैं, जबकि उनका अंतिम लक्ष्य चीन की सीमा से लगे अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र किबिथु तक पहुंचना है। इस प्रेरणादायक अभियान का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण, देशभक्ति और अटूट साहस का संदेश देना है।
कोलकाता में एनसीसी के बंगाल व सिक्किम निदेशालय में गुरुवार को उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में एनसीसी कैडेटों को उनसे सीधे संवाद का अवसर मिला।
अपने संघर्षों व साइकिल यात्रा के अनुभवों को किया साझा
यहां उन्होंने अपने संघर्षों, कठिनाइयों और साहसिक साइकिल यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं को बताया कि सीमाएं केवल सोच में होती हैं, हकीकत में नहीं।
कार्यक्रम के दौरान एनसीसी के बंगाल व सिक्किम निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) मेजर जनरल अमर पाल सिंह चहल और बड़ी संख्या में मौजूद कैडेट्स उनके साहस और आत्मविश्वास से गहराई से प्रभावित हुए। आशा मालवीय के प्रेरणादायक संबोधन ने कैडेटों के भीतर देश सेवा, साहस, अनुशासन और उत्कृष्टता की नई ऊर्जा भर दी।
एनसीसी के एडीजी ने आशा के साहस की प्रशंसा की
इस मौके पर एनसीसी के एडीजी मेजर जनरल चहल ने देशव्यापी साइकिल यात्रा पर निकलीं आशा के साहस की प्रशंसा की। यह आयोजन केवल एक प्रेरक संवाद नहीं, बल्कि नारी शक्ति के उस सशक्त स्वर का प्रतीक बन गया, जो आज के भारत को और मजबूत, आत्मनिर्भर और एकजुट बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
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