करीब 35 सालों से अमेरिका में रह रहीं भारतीय मूल की कोर्ट इंटरप्रेटर मीनू बत्रा को इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की हिरासत से रिहा कर दिया गया है। हिरासत में लिए जाने की उनकी कानूनी हफ्तों तक चली।
53 साल की मीनू बत्रा टेक्सास की इमिग्रेशन अदालतों में हिंदी, पंजाबी और उर्दू का अनुवाद करने के लिए जानी जाती हैं। उनको मार्च के मध्य से हिरासत में रखे जाने के बाद 30 अप्रैल को रिहा कर दिया गया।
मीनू बत्रा की हिरासत को लेकर जज ने उठाए सवाल
जज ने उनकी हिरासत की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट औचित्य या उचित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के हिरासत में रखा गया था। न्यायाधीश ने कहा कि हिरासत में लिए जाने से पहले उन्हें “कोई प्रक्रियात्मक सुरक्षा नहीं दी गई थी” और उनकी रिहाई का आदेश देते हुए, बिना उचित नोटिस के भविष्य में हिरासत में लिए जाने पर रोक लगा दी।
हिरासत में कब लिया गया था?
बत्रा को 17 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। ICE एजेंटों ने उन्हें टेक्सास के वैली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोका था। वह मिल्वौकी में एक काम के सिलसिले में यात्रा कर रही थीं। हिरासत के दौरान उन्हें रेमंडविले में अल वैले डिटेंशन सेंटर में रखा गया था।
हिरासत में रहते हुए एक फोन इंटरव्यू में उन्होंने इस अनुभव को बेहद परेशान करने वाला बताया और कहा कि उन्हें “अपमानित महसूस हुआ और उनके साथ एक अपराधी जैसा बर्ताव किया गया।” उनके वकील, दीपक अहलूवालिया ने बताया कि एक संघीय न्यायाधीश द्वारा उनकी रिहाई के लिए एक अस्थायी रोक आदेश जारी करने से कुछ ही समय पहले उन्हें पैरोल दे दी गई थी।
बत्रा लगभग 35 सालों से अमेरिका में रह रही हैं और चार बच्चों की मां हैं, जो अमेरिका के नागरिक हैं। उन्होंने दो दशकों से ज्यादा समय तक एक सर्टिफाइड कोर्ट इंटरप्रेटर के तौर पर काम किया है और माना जाता है कि वह टेक्सास में एकमात्र लाइसेंस्ड पंजाबी, हिंदी और उर्दू इंटरप्रेटर हैं।
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