आठ साल से लगातार स्वच्छता में नंबर वन का खिताब हासिल करने वाले इंदौर नगर निगम ने अपना पहला क्रम बरकरार रखने के लिए फिर तैयारी शुरू कर दी है। शहर में नो थू-थू अभियान शुरू किया गया है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे पान-गुटखे की पीक सड़कों पर या सार्वजनिक दीवारों पर न थूकें। मेयर पुष्यमित्र भार्गव इस अभियान की अगुवाई करते हुए सरवटे बस स्टैंड पहुंचे और लाल धब्बों के निशान उन्होंने खुद साफ किए। उनके साथ खड़े बच्चों व युवकों ने तख्तियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि शहर को स्वच्छ बनाएं, यहां-वहां न थूकें।
दरअसल इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के नियमों में बदलाव किया गया है। सर्वेक्षण के लिए कुल 12,500 अंक निर्धारित किए गए हैं। रैंकिंग सुधारने के लिए शहरों को कचरा प्रबंधन को और व्यापक बनाना होगा। इस बार रैंकिंग केवल कचरा उठाने से तय नहीं होगी। सार्वजनिक स्थानों और सरकारी दफ्तरों की दीवारों पर पान-गुटखा के दाग मिलने पर रैंकिंग नीचे गिर सकती है। शहरों को रेड स्पॉट मुक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस कारण इंदौर नगर निगम ने भी नो थू-थू अभियान शुरू किया है। इसके अलावा डिजिटल फीडबैक और निगरानी जनता से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को पूरे साल के लिए खुला रखा गया है। लोग वोट फॉर माय सिटी ऐप, स्वच्छता ऐप और क्यूआर कोड के माध्यम से अपनी राय दे सकते हैं। कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया की अब ऑनलाइन निगरानी और डिजिटल ऑडिट किया जाएगा।
डिवाइडरों पर होते हैं सबसे ज्यादा रेड स्पॉट
शहर में सबसे ज्यादा रेड स्पॉट सिग्नलों के डिवाइडरों पर होते हैं। चालक जब सिग्नल पर रुकते हैं तो वे गुटखा थूकते हैं और उसके दाग डिवाइडरों पर होते हैं। इसके अलावा बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन की दीवारों, सार्वजनिक शौचालयों में भी सबसे ज्यादा रेड स्पॉट रहते हैं।
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