पंजाब के जगरांव में सबसे युवा पार्षद एडवोकेट हिमांशू मलिक ने आप विधायक सरबजीत कौर मानूके पर उसे धमकियां देना का आरोप लगाया है। एडवोकेट हिमांशू मलिक ने अपनी सुरक्षा को लेकर पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में पार्षद हिमांशू मलिक ने आप आदमी पार्टी की विधायक सरबजीत कौर मानूके पर उसे धमकियां देने के आरोप लगाते हुए अपनी जान को भी खतरा बताया। इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मामले को लेकर अब पुलिस ने लोगों समेत पार्षद हिमांशू मलिक के बयान भी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
पार्षद हिमांशू मलिक ने बताया कि काउंसिल चुनाव में वह आजाद उम्मीदवार जीते थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के काउंसिल प्रधान जतिंदरपाल राणा को अपना समर्थन दिया था। आरोप है कि विधायक मानूके अपने किसी चहेते को काउंसिल प्रधान बनाना चाहती थी। इस को लेकर आप विधायक मानूके हिमांशू को अपने पक्ष में करना चाहती थी। हिमांशू ने जतिंदरपाल राणा का समर्थन नहीं छोड़ा तो विधायक ने अपनी पावर का फायदा उठाते हुए उसे मानसिक तौर पर परेशान किया। उसे झूठे केस में फंसाने की साजिश रची। विधायक ने लोगों के सामने धमकी दी कि वह पार्षद हिमांशू को झूठे केस में फंसा कर जेल भेज देगी। हिमांशू ने विधायक के खिलाफ एसएसपी जगरांव को शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद वह हाईकोर्ट पहुंचे।
हाईकोर्ट ने पुलिस को मामले की जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके बाद पुलिस ने मामले को लेकर हिमांशू को सबूत पेश करने को कहा तो लगभग 50 लोगों ने एसएसपी दफ्तर में विधायक के खिलाफ अपने बयान दर्ज करवाए।
पार्षद एडवोकेट हिमांशू मलिक ने बताया कि विधायक सरबजीत कौर मानूके उसे 2022 से परेशान कर रही थी। विधायक ने उसके वार्ड के काम रोकने के साथ साथ मानसिक परेशान भी किया।
वर्ष 1980 में कोठे राधा की पंचायत की तरफ से कुछ जमीन गरीबों को रहने के लिए दी थी, जिसको लेकर बाद में काउंसिल ने उस जमीन पर कब्जा कर लिया। काउंसिल की तरफ से बीते दिनों करीब 50 घरों को नोटिस जारी कर जगह खाली करने का फरमान जारी किया था। इसी बात को लेकर विधायक सरबजीत कौर मानूके की पार्षद के साथ रंजिश चल रही थी।
जब काउंसिल ने 50 घरों को नोटिस निकला तो विधायक लोगों से मिलने पहुंची और उन्हें कहा कि वह लोगों के घरों को कुछ नहीं होने देगी वह सिर्फ पार्षद हिमांशू के खिलाफ है, जिसके चलते चाहे पार्षद को झूठे केस में फंसा कर जेल क्यों न भेजना पड़े। यह सुनते ही लोग विधायक के खिलाफ हो गए।
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