युद्ध रुका, महंगाई नहीं! कंपनियों ने बढ़ाए तेल-साबुन से लेकर AC के दाम

ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल युद्ध थमा हुआ है लेकिन मार्च में पूरी महीने चली इस लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतों (Crude Prices) ने आसमान छुआ तो सप्लाई चैन बाधित होने से अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। अब यह संकट महंगाई (Inflation Risk) के तौर पर सामने आने लगा है। दरअसल, भारत में एफएमसीजी कंपनीज, मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते इनपुट कॉस्ट (लागत) बढ़ने से परेशान हैं, क्योंकि कच्चे माल की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में इन कंपनियों के ऊपर कीमतें बढ़ाने का दबाव बन रहा है।

ईटी की रिपोर्ट में एक कंपनी के एक्जीक्यूटिव ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में अचानक बड़ी तेजी आने से उनके लिए बिजनेस को मैनेज करना बड़ा मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही कंज्यूमर डिमांड के प्रभावित होने का डर भी बना हुआ है। यह हालात ऐसे समय में हुए हैं जब पिछले साल सरकार ने जीएसटी की दरों में बड़ी कटौती कर आम आदमी को राहत दी थी।

सप्लाई चैन बाधित होने से बढ़ी कीमतें
मध्य पूर्व में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे कच्चे तेल (Crude Oil) और अन्य कच्चे माल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। साथ ही, रुपये की कमजोरी के कारण आयात (इम्पोर्ट) करना और माल ढुलाई (Freight) भी काफी महंगी हो गई है।

वहीं, कच्चे माल की कीमतों में उछाल के चलते FMCG (रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले उत्पाद बनाने वाली) कंपनियों की लागत 20% से 60% तक बढ़ गई है।

ऐसे में बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियों ने एयर कंडीशनर, फ्रिज, साबुन, हेयर ऑयल, कपड़े, पेंट और जूतों के दाम बढ़ा दिए हैं। कुछ कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने के बजाय प्रोडक्ट की पैकिंग (Pack size) को छोटा कर दिया है। वहीं, महीने के अंत तक कुछ और चीजों के दाम बढ़ने की आशंका है।

हर महीने कीमतों की समीक्षा
हैवेल्स इंडिया के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, अनिल राय गुप्ता ने कहा कि हमारी कंपनी हर महीने सतर्कता के साथ हालात की समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा, मैंने हाल ही में या उससे पहले अतीत में कीमतों में ऐसा उतार-चढ़ाव कभी नहीं देखा है। महंगाई अक्सर बढ़ती है लेकिन इतनी तेजी या सभी प्रोडक्ट कैटेगरी में इसका असर देखने को नहीं मिलता है।

हैवेल्स के अलावा, बजाज कंज्यूमर केयर और पार्ले (Parle) जैसी बड़ी कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि अनिश्चितता के कारण वे लंबी अवधि की योजनाएं नहीं बना पा रहे हैं और उन्हें लगभग हर दिन अपनी लागत और कीमतों की समीक्षा करनी पड़ रही है। कंपनियों को सबसे बड़ा डर यह है कि लगातार दाम बढ़ने से ग्राहक अपनी खरीदारी कम कर सकते हैं, जिससे बाजार में इन सामानों की मांग घट सकती है।

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