आज यानी 18 जनवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मौनी अमावस्या मनाई जा रही है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की इस अमावस्या को हिंदू धर्म में सभी अमावस्याओं में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, विशेषकर प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। वहीं, इस दिन मौन रहकर साधना करने का बड़ा महत्व है, आइए इस आर्टिकल में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –
मौनी अमावस्या शुभ मुहूर्त
हर्षण योग – रात 9 बजकर 11 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक
अमृत काल – सुबह 5 बजकर 2 मिनट से सुबह 6 बजकर 44 मिनट तक। (19 जनवरी)
मौनी अमावस्या की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठें। अगर नदी पर जाना मुश्किल है, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।
स्नान के बाद हाथ में जल लेकर दिन भर या कम से कम पूजा के समय तक मौन रहने का संकल्प लें।
तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और काले तिल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं।
उन्हें पीले पुष्प, फल और तुलसी दल अर्पित करें।
यह पितरों का दिन भी है, इसलिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों के नाम से तिल और जल से तर्पण करें।
पूजा के बाद तिल, गुड़, कंबल, अन्न या वस्त्र का दान किसी जरूरतमंद को जरूर करें।
क्या करें और क्या न करें?
क्या करें – इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जप करें। साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।
क्या न करें – इस बार अमावस्या पर रविवार है, इसलिए पीपल और तुलसी के पौधे को भूलकर भी न छुएं, केवल दूर से प्रणाम व पूजा-पाठ करें। इसके अलावा तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें और किसी से वाद-विवाद न करें।
मौनी अमावस्या के लाभ
धार्मिक मान्यता है कि माघ अमावस्या पर स्वर्ग से देवता पवित्र नदियों में वास करते हैं। इस दिन किया गया दान सौ यज्ञों के समान शुभ फल देता है। वहीं, इस दिन मौन धारण करने से साधक की संकल्प शक्ति बढ़ती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
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