गूगल ने सोमवार को जानकारी दी कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की सीधी जानकारी भारतीय अधिकारियों को दी जाएगी। भारत सरकार ने साफ तौर पर इस बारे में गूगल समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जानकारी मांगी थी।
गूगल का भारत को ये जानकारी देना पुराने ग्लोबल तरीके से अलग है, जिसके तहत ऐसी रिपोर्ट पहले अमेरिका की एक नॉन-प्रॉफिट संस्था को भेजी जाती थीं।
Meta के बाद Google भी देगा रिपोर्ट
गूगल से पहले मेटा (META) ने भी पिछले हफ्ते बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामले में भारत को रिपोर्ट देने के बारे में कहा था। यह फैसला भारत सरकार के Google और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर दबाव डालने के बाद आया है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने हाल के हफ्तों में टेक कंपनियों से कहा था कि भारत से जुड़े बच्चों के शोषण वाले कंटेंट की रिपोर्ट सीधे करें, क्योंकि मौजूदा सिस्टम में रिपोर्ट में काफी देरी होती है।
Google के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘कंपनी बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट का पता लगाने, उसे रोकने, हटाने और उसकी रिपोर्ट करने में काफी निवेश करती है।’
भारत ने क्यों मांगी सीधी जानकारी?
Meta और Alphabet Inc. की Google कई सालों से ऐसी रिपोर्ट अमेरिका स्थित ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन’ को भेजती रहे हैं, जो फिर संबंधित देश की कानून लागू करने वाली एजेंसियों को रिपोर्ट भेजते हैं।
भारतीय अधिकारियों ने टेक प्लेटफॉर्म से तर्क दिया था कि इस व्यवस्था में कीमती समय बर्बाद होता है, खासकर तब जब कोई बच्चा असल में खतरे में हो, क्योंकि स्थानीय पुलिस तक पहुंचने से पहले रिपोर्ट उस बीच की संस्था के पास जाती है, जबकि पुलिस ही जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर सकती है।
Google-Meta के लिए सबसे बड़ा मार्केट- भारत
मेटा के फेसबुक-इंस्टाग्राम और Google के यूट्यूब के लिए यूजर्स के मामले में भारत सबसे बड़ा बाजार है। भारत सरकार की इन टेक कंपनियों से काफी लंबे समय से बातचीत जारी थी, आखिरकार कंपनियों ने सरकार की बात मान ली है।
पिछले महीने मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग न कंपनी के प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के फैलने पर माफी भी मांगी थी।
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