लखनऊ। पीस पार्टी व निषाद दल गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव भी साथ लड़ेंगे। इन सीटों के लिए दोनों दल साझा उम्मीदवार उतारेंगे। यह घोषणा शनिवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित पीस पार्टी के उलमा सम्मेलन में की गई। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि मुसलमानों व निषादों की बीमारी एक जैसी है इसलिए इलाज भी एक जैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक होकर ही दुश्मन से लड़ा जा सकता है। हाल ही में होने वाले उपचुनाव और फिर 2019 का लोकसभा चुनाव भी हम दोनों साथ मिलकर लड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि दोनों दल 2017 का विधानसभा चुनाव भी साथ लड़े थे।  अल्पसंख्यकों को कानूनी सलाह देने को कानूनी अधिकार मंच  उलमा सम्मेलन में तय किया गया कि अल्पसंख्यकों के आपसी मसले हों या उन्हें कानूनी सलाह देना इसके लिए एक कानूनी अधिकार मंच बनाया जाए। पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने कहा कि यह मंच राष्ट्रीय, प्रादेशिक व जिले तीनों ही स्तर पर गठित किया जाएगा। इसमें उलमा, अधिवक्ता व अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों को रखा जाएगा।  गुमराह करने वाले लोग कौम के अंदर मौजूद : नदवी  दारुल उलूम नदवा के प्रधानाचार्य सइदुर्रहमान आजमी नदवी ने कहा कि गुमराह करने वाले लोग हमारे अंदर ही मौजूद हैं। हमारे मजहब के लोग ही शरीयत की खामियां हुकूमत के लोगों को बता रहे हैं। शरीयत के अंदर दखलंदाजी हो रही है। आज अचानक इन्हें मुस्लिम औरतों की चिंता क्यों होने लगी। इनका मकसद औरतों को राहत पहुंचाना नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों को बदनाम करना है। आज हमारी यह हालत सही नुमाइंदगी न मिल पाने के कारण ही हुई है। 
पीस पार्टी और निषाद दल मिलकर लड़ेंगे गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव

पीस पार्टी और निषाद दल मिलकर लड़ेंगे गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव

लखनऊ। पीस पार्टी व निषाद दल गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव भी साथ लड़ेंगे। इन सीटों के लिए दोनों दल साझा उम्मीदवार उतारेंगे। यह घोषणा शनिवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित पीस पार्टी के उलमा सम्मेलन में की गई। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि मुसलमानों व निषादों की बीमारी एक जैसी है इसलिए इलाज भी एक जैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक होकर ही दुश्मन से लड़ा जा सकता है। हाल ही में होने वाले उपचुनाव और फिर 2019 का लोकसभा चुनाव भी हम दोनों साथ मिलकर लड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि दोनों दल 2017 का विधानसभा चुनाव भी साथ लड़े थे। लखनऊ। पीस पार्टी व निषाद दल गोरखपुर व फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव भी साथ लड़ेंगे। इन सीटों के लिए दोनों दल साझा उम्मीदवार उतारेंगे। यह घोषणा शनिवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित पीस पार्टी के उलमा सम्मेलन में की गई। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि मुसलमानों व निषादों की बीमारी एक जैसी है इसलिए इलाज भी एक जैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक होकर ही दुश्मन से लड़ा जा सकता है। हाल ही में होने वाले उपचुनाव और फिर 2019 का लोकसभा चुनाव भी हम दोनों साथ मिलकर लड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि दोनों दल 2017 का विधानसभा चुनाव भी साथ लड़े थे।   अल्पसंख्यकों को कानूनी सलाह देने को कानूनी अधिकार मंच  उलमा सम्मेलन में तय किया गया कि अल्पसंख्यकों के आपसी मसले हों या उन्हें कानूनी सलाह देना इसके लिए एक कानूनी अधिकार मंच बनाया जाए। पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने कहा कि यह मंच राष्ट्रीय, प्रादेशिक व जिले तीनों ही स्तर पर गठित किया जाएगा। इसमें उलमा, अधिवक्ता व अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों को रखा जाएगा।   गुमराह करने वाले लोग कौम के अंदर मौजूद : नदवी  दारुल उलूम नदवा के प्रधानाचार्य सइदुर्रहमान आजमी नदवी ने कहा कि गुमराह करने वाले लोग हमारे अंदर ही मौजूद हैं। हमारे मजहब के लोग ही शरीयत की खामियां हुकूमत के लोगों को बता रहे हैं। शरीयत के अंदर दखलंदाजी हो रही है। आज अचानक इन्हें मुस्लिम औरतों की चिंता क्यों होने लगी। इनका मकसद औरतों को राहत पहुंचाना नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों को बदनाम करना है। आज हमारी यह हालत सही नुमाइंदगी न मिल पाने के कारण ही हुई है। 

अल्पसंख्यकों को कानूनी सलाह देने को कानूनी अधिकार मंच 

उलमा सम्मेलन में तय किया गया कि अल्पसंख्यकों के आपसी मसले हों या उन्हें कानूनी सलाह देना इसके लिए एक कानूनी अधिकार मंच बनाया जाए। पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अयूब ने कहा कि यह मंच राष्ट्रीय, प्रादेशिक व जिले तीनों ही स्तर पर गठित किया जाएगा। इसमें उलमा, अधिवक्ता व अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों को रखा जाएगा। 

गुमराह करने वाले लोग कौम के अंदर मौजूद: नदवी 

दारुल उलूम नदवा के प्रधानाचार्य सइदुर्रहमान आजमी नदवी ने कहा कि गुमराह करने वाले लोग हमारे अंदर ही मौजूद हैं। हमारे मजहब के लोग ही शरीयत की खामियां हुकूमत के लोगों को बता रहे हैं। शरीयत के अंदर दखलंदाजी हो रही है। आज अचानक इन्हें मुस्लिम औरतों की चिंता क्यों होने लगी। इनका मकसद औरतों को राहत पहुंचाना नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों को बदनाम करना है। आज हमारी यह हालत सही नुमाइंदगी न मिल पाने के कारण ही हुई है। 

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