पीलीभीत टाइगर रिजर्व को इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) घोषित किया गया है। इसके तहत जंगल की सीमा से दो किमी तक के क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन में शामिल किया गया है। अब इस दायरे में किसी भी प्रकार की औद्योगिक गतिविधि या पक्का निर्माण नहीं हो सकेगा। कुटीर और ग्राम उद्योग के साथ पर्यटन सुविधा पर सशर्त छूट मिलेगी।
पीटीआर का जंगल 73 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण सुरक्षा को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इको सेंसेटिव जोन तय किया जाता है। पीटीआर में लंबे समय से इको सेंसेटिव जोन की सीमा को लेकर मामला अटका था। पूर्व में मंत्रालय की ओर से पीटीआर से आपत्ति मांगी गई थी। अब मंगलवार को पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पीटीआर के इको सेंसेटिव जोन की अधिसूचना जारी कर दी गई। जंगल सीमा से सटे दो किलोमीटर दायरे को इको सेंसेटिव जोन में शामिल किया गया है। ऐसे में पीटीआर के 73 हजार वर्ग किलोमीटर दायरे में से 575 वर्ग किलोमीटर दायरा इको सेंसेटिव में शामिल हुआ है।
शासन की ओर से जिले में उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2023 में कई निवेशकों ने पर्यटन से संबंधित प्रस्ताव दिए थे। पर्यटन से संबंधित करीब आठ उद्योग स्थापित करने पर सहमति भी बनी थी। जमीन की तलाश के साथ अन्य प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन पीटीआर के इको सेंसेटिव जोन का निर्धारण न होने से प्रोजेक्ट अधर में अटक गए। एनओसी का मामला भी फंसा। अब अधिसूचना जारी होने के बाद संरक्षित क्षेत्र को लेकर बना संशय दूर हो गया है।
60 दिन में आपत्ति का समय, समिति करेगी जांच
इको सेंसेटिव जोन की अधिसूचना जारी होने के बाद दावे और आपत्तियों के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठन की बात कही जा रही है। इको सेंसेटिव जोन की अधिसूचना में निहित प्रस्तावों पर कोई आपत्ति या सुझाव के लिए 60 दिन में लिखित रूप से अपना पक्ष रखा जा सकता है।
इको सेंसेटिव जोन के दायरे में 230 गांव
इको सेंसेटिव जोन के निर्धारण के बाद जंगल सीमा से सटे 230 गांव दायरे में आए हैं। इसमें कुछ गांव शाहजहांपुर जिले के भी शामिल हैं।
जोन में बने ढांचों की रिपोर्ट तलब
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इको सेंसेटिव जोन के दो किलोमीटर का दायरा तय होने के बाद प्रशासन ने बने और अधबने सभी ढांचों की रिपोर्ट तलब की है। इसके तहत पीटीआर की सभी पांच रेंज के रेंजरों को अपने-अपने क्षेत्र में सर्वे कर वास्तविक लोकेशन सहित रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सत्यापन के बाद उच्च अधिकारियों से आगे की कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन लिया जा सके। इको सेंसेटिव जोन क्षेत्र में यह आंकलन किया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन कर कहीं अनाधिकृत निर्माण तो नहीं किया जा रहा था। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि अधूरे और रुके हुए सभी ढांचों की रिपोर्ट मांगी गई है।
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