पहली बार रविवार को पेश हो रहा बजट, जानिए किन मुद्दों पर रहेगा फोकस और बहीखाता में क्या होगा खास

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में ऐतिहासिक बजट 2026-27 पेश करेंगी, जो पहली बार रविवार को आ रहा है। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। लोग आयकर में छूट, कस्टम ड्यूटी में बदलाव और आर्थिक विकास के मजबूत कदमों की उम्मीद कर रहे हैं। बजट में राजकोषीय घाटा, रक्षा खर्च, कृषि, MSME और AI जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे भारत की आर्थिक दिशा तय होगी।

कुछ ही घंटों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में संघीय बजट 2026-27 पेश करने वाली हैं। यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक होगा। पहली बार यह बजट रविवार को पेश हो रहा है, जो दशकों पुरानी परंपरा में एक बड़ा बदलाव है।

निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। वह भारत की पहली वित्त मंत्री बनेंगीं, जिन्होंने इतनी लगातार बार यह जिम्मेदारी निभाई है। इस खास मौके पर घरों से लेकर उद्योगों और शेयर बाजार तक सबकी नजरें टिकी हैं।

लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बजट में कर सुधार, कस्टम ड्यूटी में बदलाव और आर्थिक विकास को बनाए रखने के मजबूत कदम उठाए जाएंगे। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक जोखिम और व्यापार की अनिश्चितता के बीच यह बजट भारत की मजबूती दिखाने वाला होगा।

आयकर में राहत की उम्मीदें सबसे ऊपर
टैक्सपेयर्स की सबसे बड़ी मांग आयकर में और छूट है। बजट 2025 में आयकर छूट सीमा 12 लाख रुपये तक बढ़ाई गई थी और जीएसटी में भी बदलाव किए गए थे। अब लोग उम्मीद कर रहे हैं कि स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाया जाए।

नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के 1 अप्रैल से लागू होने के साथ ही ट्रांजिशन नियमों, नियमों और सवालों-जवाबों पर स्पष्टता की मांग है।

नए टैक्स रिजीम में बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट 4 लाख रुपये है। 4 से 8 लाख पर 5%, 8 से 12 लाख पर 10%, 12 से 16 लाख पर 15%, 16 से 20 लाख पर 20%, 20 से 24 लाख पर 25% और 24 लाख से ऊपर 30% टैक्स है। सेक्शन 87A के रिबेट से 12 लाख तक की आय प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री है, जबकि सैलरीड लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद यह 12.75 लाख तक जाता है।

घरेलू परिवारों के लिए बजट क्यों मायने रखता है?
बजट के फैसले सीधे घरों पर असर डालते हैं। आयकर में छूट, सब्सिडी और कल्याण योजनाओं से डिस्पोजेबल इनकम बढ़ती है। बजट 2025 की राहत से मिडिल क्लास परिवारों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी थी।

इससे रिटेल, ऑटोमोबाइल, हाउसिंग और FMCG जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ती है। हाउसिंग को सपोर्ट करने वाले कदम निर्माण क्षेत्र को मजबूत करते हैं।

टैक्स स्लैब और डिडक्शन में बदलाव की मांग
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल क्लास को राहत के लिए रिबेट थ्रेशोल्ड 15 लाख तक बढ़ाया जा सकता है। नौकरीपेशा लोग 30% टैक्स स्लैब की सीमा 30 लाख तक ले जाने की मांग कर रहे हैं। पुराने टैक्स रिजीम में भी कम दरें और ऊंची छूट की मांग है।

सेक्शन 80सी सबसे लोकप्रिय डिडक्शन है, जो पुराने रिजीम में 1.5 लाख तक की छूट देता है। पीएफ, पीपीएफ, म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस जैसे निवेशों पर यह लागू होता है। कई साल से यह लिमिट नहीं बदली है।

विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इसे बढ़ाया जाए और नया रिजीम में भी यह डिडक्शन दिया जाए, ताकि लोग नए रिजीम की ओर ज्यादा आकर्षित हों।

फिस्कल डेफिसिट पर शेयर बाजार की नजर
शेयर बाजार के लिए यह बजट विकास, फिस्कल डेफिसिट (वित्तीय घाटा) और कॉर्पोरेट कमाई का संकेत देगा। FY26 में टैक्स राहत के बावजूद फिस्कल डेफिसिट 4.4% GDP पर टारगेट था। बजट के दिन स्पेशल ट्रेडिंग सेशन में बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन अंत में इंडेक्स लगभग स्थिर रहे।

डिफेंस खर्च पर क्या रहेगा खर्च?
उम्मीद जताई जा रही है कि बजट में FY27 से डेट-टू-GDP रेशियो कम करने के कदम बताए जाएंगे। वैश्विक तनाव के बीच डिफेंस खर्च बढ़ेगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट 4.2-4.4% अनुमानित है। डेट को FY31 तक 50±1% GDP पर लाने का लक्ष्य है।

डिफेंस कैपिटल आउटले में बढ़ोतरी की मांग है। FY26 में इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट और अप्रूवल्स में बड़ा उछाल आया था। FICCI ने डिफेंस बजट का 30% कैपिटल आउटले, DRDO फंडिंग में 10,000 करोड़ की बढ़ोतरी और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विस्तार सुझाया है।

कृषि, MSME और अन्य क्षेत्रों पर फोकस
कृषि और MSME को बजट 2025 में पहला और दूसरा ग्रोथ इंजन बताया गया था। इन पर फोकस जारी रहेगा। 8वें पे कमीशन, 16वें फाइनेंस कमीशन के तहत ज्यादा टैक्स डेवोल्यूशन, MSME के लिए ज्यादा आवंटन, जेम्स एंड ज्वेलरी, गारमेंट्स, लेदर जैसे सेक्टरों के लिए सपोर्ट और क्रिटिकल मिनरल्स तथा विकास भारत रोजगार योजनाओं के लिए फंडिंग की उम्मीद है।

AI, लॉजिस्टिक्स और टेलीकॉम में उम्मीदें
टेक कंपनियां AI को बढ़ावा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन की उम्मीद कर रही हैं। इकोनॉमिक सर्वे में AI को आर्थिक रणनीति बताया गया है। सेक्टर-विशेष बॉटम-अप अप्रोच पर जोर है। लॉजिस्टिक्स और टेलीकॉम सेक्टर में ऑटोनॉमस और एप्लाइड AI के लिए पॉलिसी सपोर्ट की मांग है।

विकास, राजस्व और वैश्विक जोखिमों में संतुलन
टैक्स कट से राजस्व पर दबाव है, लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर बजट का मुख्य आधार रहेगा। UBI ने FY27 के लिए कैपेक्स 12.4 लाख करोड़ (GDP का 3.2%) अनुमानित किया है। रोड, रेलवे और डिफेंस मुख्य फोकस क्षेत्र होंगे। अमेरिकी टैरिफ, कमोडिटी की अस्थिरता और वैश्विक रिकवरी के बीच निवेशक विश्वास बहाल करना चुनौती है।

टेक्सटाइल, अपैरल, सीफूड, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और फुटवियर जैसे निर्यात क्षेत्र अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हैं। इनके लिए टारगेटेड राहत और पॉलिसी सपोर्ट की मांग है। यह बजट भारत की आर्थिक दिशा तय करेगा और आने वाले सालों के लिए मजबूत नींव रखेगा।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com