दिमाग से गंदगी बाहर निकालने के लिए जरूरी है चलना-फिरना

क्या आप जानते हैं कि आपका थोड़ा सा चलना-फिरना या शरीर को स्ट्रेच करना आपके दिमाग के लिए एक वैक्यूम क्लीनर की तरह काम कर सकता है? 

हाल ही में अमेरिका की पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक बेहद दिलचस्प रिसर्च किया है, जो बताता है कि फिजिकल एक्टिविटी केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग की अंदरूनी सफाई के लिए भी कितनी जरूरी है। आइए जानें इस बारे में। 

कैसे काम करता है यह दिमागी पंप?

नेचर न्यूरोसाइंस जर्नल में पब्लिश इस रिसर्च के अनुसार, जब भी हम खड़े होते हैं या कदम बढ़ाते हैं, तो हमारे पेट की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं। यह सिकुड़न शरीर में एक नेचुरल पंप की तरह काम करती है।

यह पंप खून को स्पाइनल कार्ड की ओर धकेलता है, जिससे एक हल्का दबाव पैदा होता है। यह दबाव दिमाग के भीतर एक माइक्रो मूवमेंट पैदा करता है, जिससे आपके दिमाग की सफाई प्रक्रिया शुरू होती है।

दिमाग का सुरक्षा कवच
दिमाग के चारों ओर सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड नाम का एक फ्लूइड होता है। इस फ्लूइड के तीन मुख्य काम होते हैं-

दिमाग तक जरूरी पोषण पहुंचाना।
दिमाग को बाहरी झटकों से बचाना।
दिमाग में जमा गंदगी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालना।

जब हम शारीरिक रूप से एक्टिव होते हैं, तो पैदा होने वाला दबाव इस फ्लूइड के फ्लो को तेज कर देता है। वैज्ञानिकों ने इस पूरी प्रक्रिया को ग्लिम्फैटिक सिस्टम का हिस्सा बताया है, जो असल में हमारे दिमाग की सफाई व्यवस्था है।

गंदे स्पंज की तरह होती है सफाई
वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को समझने के लिए ‘गंदे स्पंज’ को निचोड़ने जैसा बताया। जिस तरह एक गंदे स्पंज को हाथ से दबाने पर उसमें जमा गंदा पानी बाहर निकल जाता है और वह साफ हो जाता है, ठीक उसी तरह जब शारीरिक गतिविधि से दिमाग में हलचल होती है, तो वहां जमा गंदगी बाहर निकल जाती है।

चूहों पर हुई रिसर्च
चूहों पर किए गए प्रयोगों में देखा गया कि जैसे ही उनकी मांसपेशियां एक्टिव हुईं, उनके दिमाग में हलचल बढ़ गई और फ्लूइड का बहाव तेज हो गया। अक्सर हम सोचते हैं कि दिमाग को तेज करने के लिए सिर्फ पहेलियां सुलझाना या पढ़ना ही काफी है, लेकिन यह शोध साबित करता है कि फिजिकल एक्टिविटी दिमाग को तरोताजा रखने का नेचुरल तरीका है।

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