गुजराती में आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली का विमोचन, शाह बोले- स्थापित की भारत की ज्ञान परंपरा

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारत की पहचान और सनातन धर्म को चारों दिशाओं में फैलाया। उन्होंने न सिर्फ यात्रा की और मठ बनाए, बल्कि ज्ञान की परंपरा को संरक्षित कर लोगों के सवालों का तार्किक उत्तर भी दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट-

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय पहचान को स्थापित किया और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज सभी दिशाओं में बुलंद रहे।

शाह ने बृहस्पतिवार को गुजराती में शंकराचार्य की ग्रंथावली का विमोचन करने के बाद एक सभा को संबोधित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि अद्वैत वेदांत के 8वीं सदी के विद्वान की 15 संस्करण में प्रकाशित पूरी रचनाएं गुजरात के युवाओं को उन्हें समझने में मदद करेंगी और उनके जीवन और काम पर असर डालेंगी। उन्होंने कहा कि उस समय के समाज में मौजूद सभी सवालों के जवाब आपको इन ग्रंथों में मिलेंगे।

‘शंकराचार्य सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में ऊंचा रखा’
शंकराचार्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग इतने कम जीवन में इतना कुछ कर पाते हैं। शंकराचार्य ने पूरे देश में पैदल यात्रा की और एक तरह से उन्होंने चलती-फिरती यूनिवर्सिटी की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने सिर्फ यात्रा ही नहीं की, बल्कि उन्होंने भारत की पहचान बनाई, चारों दिशाओं में चार मठ बनाए, ज्ञान के केंद्र स्थापित किए और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में ऊंचा रखा।

उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य के मठ सिर्फ धार्मिक केंद्र नहीं बने, बल्कि उन्होंने वेदों का वितरण और संरक्षण सुनिश्चित किया, ताकि ज्ञान की परंपरा स्थायी रूप से संरक्षित और प्रसारित हो। उन्होंने यह भी कहा कि अपने जीवनकाल में आदिशंकराचार्य ने बौद्ध, जैन, कपालिक और तांत्रिक परंपराओं के उदय के बीच सनातन धर्म से जुड़े प्रश्नों और शंकाओं का तार्किक उत्तर दिया। उन्होंने कहा आदि शंकराचार्य ने केवल विचार नहीं दिए, बल्कि भारत को विचारों का संलयन, ज्ञान का स्वरूप और मोक्ष का मार्ग भी दिखाया।

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