खामोशी से भारत ने किया ‘खेला’, वियतनाम को पछाड़ बना Apple का चहेता

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी एप्पल के स्मार्टफोन हर कोई रखना चाहता है। ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में एप्पल की हिस्सेदारी लगभग 17.3% है। एक समय था जब यह कंपनी अपने अधिकतर फोन चीन और ताइवान जैसे देशों में बनाती है। लेकिन आज कहानी उल्टी हो रही है।

भारत धीरे-धीरे करके Apple की सप्लाई चेन का नया बॉस बन रहा है। यही कारण है कि भारत में एप्पल के सप्लायर्स की संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है। यह संख्या इतनी बढ़ी है कि भारत ने वियतनाम को चुपके से पीछे छोड़ दिया है।

एप्पल की ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत चुपके से अपनी स्थिति को और मजबूत बना रहा है। भारत ने सप्लायर्स की कुल संख्या के मामले में वियतनाम को पीछे तो छोड़ा ही, साथ ही साथ पड़ोसी चीन को भी एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, भारत ने चीनी सप्लायर्स पर अपनी निर्भरता कम की है। भारत ने चीन की बजाय घरेलू या गैर-चीनी कंपनियों से नए वेंडर्स चुने।

भारत में एप्पल सप्लायर्स की संख्या 40 के पार पहुंची
एक रिपोर्ट के अनुसार Apple Inc. की ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत और वियतनाम का बहुत बड़ा रोल है। कैलेंडर वर्ष (CY) 2025 में, भारत ने देश में काम कर रहे Apple सप्लायर्स की कुल संख्या के मामले में वियतनाम को चुपचाप पीछे छोड़ दिया है।

Apple के सप्लायर डेटा और इंडस्ट्री के आकलन के आधार पर, भारत में Apple सप्लायर्स की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। 2023 में सिर्फ़ 14 से बढ़कर CY 2025 में 40 से ज्यादा हो गई है।

इसके विपरीत, वियतनाम में, जहां Apple ने 2016 में 18 सप्लायर्स के साथ काम किया था, अब 35 से कुछ अधिक सप्लायर्स हैं। भारत ने सिर्फ वियतनाम को ही नहीं बल्कि फिलीपींस, मलेशिया और सिंगापुर जैसे अन्य देशों को एप्पल सप्लायर बेस के मामले में पीछे छोड़ दिया है।

भारत ने चीन पर निर्भरता कम की
भारत ने चीनी वेंडर्स पर अपनी निर्भरता को कम किया है। जब एप्पल भारत में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI) के लिए पात्र हुई तो उसने यह प्लान कियया कि वह अपनी 80 फीसदी सप्लाई चेन को चीन से भारत में शिफ्ट करेगा। इसके लिए फिर चाहे उसे क्यों न ज्वाइंट वेंचर ही बनाना पड़े।

कैलेंडर ईयर 2025 में एप्पल इंडिया की चीन पर निर्भरता 10 फीसदी से भी नीचे आ गई। ये 10 फीसदी वही कंपनियां हैं, जिन्हें गलवान घाटी से पहले जिन कंपनियों को भारत में काम करने के लिए अप्रूवल मिला था।

इससे पहले चीनी फर्मों की हिस्सेदारी 15 से 20 फीसदी थी। इसके विपरीत, वियतनाम में Apple के लगभग 37 प्रतिशत सप्लायर चीन या हांगकांग से हैं। थाईलैंड में यह 25 से 35 फीसदी है।

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