पंजाब को ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) मुक्त बनाने का लक्ष्य फिलहाल पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। प्रदेश में टीबी घातक रूप धारण करता जा रहा है। रोजाना औसतन 172 नए मरीज सामने आ रहे हैं। वर्ष 2025 में भी टीबी के मरीजों ने 52 हजार का आंकड़ा पार कर लिया। यह बात स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में जनवरी से अक्तूबर के अंदर ही 52,578 मरीज टीबी से ग्रस्त पाए गए हैं। इस तरह नवंबर और दिसंबर के फाइनल आंकड़े आने के बाद मरीजों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी जबकि वर्ष 2024 में पूरे साल के दौरान टीबी के 59,020 मरीज सामने आए थे। टीबी के रोजाना आने वाले केसों में पहले से कोई कमी नहीं आ रही है बल्कि इनमें बढ़ोतरी हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पहले सही टेस्टिंग में बढ़ोतरी की गई है ताकि सभी ग्रस्त मरीजों का पता लगाकर उनका इलाज कराया जा सके और बीमारी को फैलने से रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग अब सरकारी अस्पतालों में इलाज न कराने वालों मरीजों पर भी नजर रख रहा है। लुधियाना, जालंधर, बठिंडा, पटियाला व अमृतसर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है क्योंकि इन जिलों में टीबी का खतरा अधिक है। खासकर औद्योगिक हब लुधियाना में टीबी के अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यहां स्थानीय की जगह प्रवासी मरीज टीबी के अधिक चपेट में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार देश भर में वर्ष 2015 के दौरान एक लाख लोगों की टेस्टिंग में टीबी के 237 मरीज संक्रमित पाए जा रहे थे जबकि वर्ष 2024 में 187 मरीज सामने आ रहे हैं। एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान की जा रही है। चेस्ट एक्स-रे से समय पर स्क्रीनिंग की जा रही है। इस तरफ विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि मरीज बीच में इलाज अधूरा न छोड़े।
सरकारी के साथ निजी अस्पतालों के मरीजों को किया जा रहा ट्रैक
स्वास्थ्य विभाग सरकारी के साथ ही निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को भी ट्रैक कर रहा है। ऐसे मरीजों को टीबी से संबंधित दिशा-निर्देशों की अच्छी से पालना करने की अपील की जा रही है। मरीज के संपर्क में आए लोगों का पता लगाकर उनकी टेस्टिंग की जा रही है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज करवाने की भी मरीजों को पेशकश की जा रही है।
इस तरह फैलता है संक्रमण
टीबी एक संक्रामक रोग है। जब कोई टीबी का मरीज खांसता या छींकता है तो उससे निकलने वाले कणों के संपर्क में आने से लोग टीबी का शिकार हो सकते हैं। अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज कराया जाए और इलाज को पूरा किया जाए तो मरीज पूरी तरह से इससे ठीक हो सकता है। 46 से 60 वर्ष की आयु के मरीजों के लिए टीबी अधिक खतरनाक है क्योंकि इस वर्ग में टीबी की मृत्यु दर भी अधिक है।
पंजाब को टीबी मुक्त बनाने के लिए पहले से टेस्टिंग बढ़ा दी गई है। इससे संक्रमित मरीजों का जल्द पता लगाकर समय पर इलाज शुरू किया जा रहा है ताकि टीबी को आगे फैलने से रोका जा सके। सरकारी अस्पतालों में इलाज न कराने वाले मरीजों पर भी नजर रखी जा रही है।– राजेश भास्कर, राज्य टीबी अधिकारी, पंजाब
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