Sunday , 5 December 2021

हिन्दू मंदिर में धर्मध्वज नहीं, राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है !

हिन्दू मंदिर में धर्मध्वज नहीं, राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है !आप जब रांची जाए, तो एक काम ज़रूर करें। वहाँ स्थित पहाड़ी बाबा के मंदिर ज़रूर जाइये । यह हिन्दू मंदिर अनोखा इसलिए हैं, क्यूंकि इस मंदिर की एक अनोखी परंपरा है। यहां हर स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज बड़े शान से फहराया जाता है । यह मंदिर सिर्फ धर्म का नहीं, बल्कि देश-प्रेम का भी प्रचार बहुत ज़ोर-शोर से करता है।

यह मंदिर रांची के रेलवे स्टेशन से सात किलोमीटर की दूरी पर है। पहाड़ी बाबा का यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, और इसकी ऊचाई तक़रीबन 350 फीट है। आपको हमारे देश में बहुत कम ऐसे मंदिर मिलेंगे जहाँ राष्ट्रध्वज फहराया जाता हो । अगर आप और ऐसे मंदिरों के बारें में जानते हो जहाँ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया जाता हो, तो हमें ज़रूर बताइयेगा ।

ज़्यादातर यह देखा गया है, की धार्मिक स्थानों में धर्म का ध्वज ही लहराता है । परन्तु इस मंदिर में आप पाएंगे की राष्ट्रध्वज को बहुत शान से लहराया जाता है । यह परंपरा आज कल की नहीं है, आप को यह जान कर बहुत ख़ुशी होगी की यह परंपरा 14 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि से ही शुरू की गई थी। उस दिन के बाद से हर साल 26th जनवरी की सुबह पूजा के बाद यहाँ राष्ट्रगान गाया जाता है, और फिर तिरंगा फहराया जाता है। इस परंपरा में बहुत से लोग भाग लेते हैं, और गर्व महसूस करते हैं। इस दिन यहाँ सिर्फ भक्त नहीं आते, बल्कि हर वो शख्स जो भारत माता से सच्चा प्यार करता है, इस दिन मंदिर में मौजूद रहता है। यह मंदिर सिर्फ देश-प्रेम का सन्देश नहीं फैला रहा है, इस मंदिर ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी बहुत काम किये है।

 इस हिन्दू मंदिर में 428 सीढियाँ है 

जब आप इस मंदिर में जायेंगे, तो आप सबसे पहले देखेंगे की जिस पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है,वहाँ हजारों वृक्ष लगाये गए हैं इन वृक्षों की गिनती एक हज़ार से ज्यादा होगी। इस मंदिर तक पहुचने के लिए भक्तो को 428 सीढियाँ चढ़नी पड़ती हैं। जब आप ऊपर पंहुचते हैं, तो मंदिर के आँगन से आप रांची के बहुत खूबसूरत नज़ारे देख सकते हैं । यहाँ से आपको बहुत अनुपम सूर्योदय और सूर्यास्त भी दिखेंगे ।

यह मंदिर पिछले ज़माने में टिरीबुरू के नाम से प्रसिद्ध था, और अंग्रेजों के समय में इसका नाम फाँसी टुंगरी भी पैड गया था। आप नाम से समझ ही गए होंगे, की अँगरेज़ इस जगह पर उन लोगों को फाँसी देते थे, जो की देशद्रोही का काम करते थे। शायद यह इतिहास ही एक कारण है, की इस मंदिर में धर्म और देश प्रेम का एक जैसा प्रचार होता है। यह मंदिर उन शहीदों का भी प्रतीक हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने यहाँ फाँसी पर चढ़ा दिया था। तिरंगा उन साहसी देश प्रेमियों की याद में भी लहराया जाता हैं ।

मंदिर के मुख्य पंडित देवीदयाल मिश्र उर्फ देवी बाबा, से वार्तालाप करने पर आप जानेगे की यह मंदिर छोटानागपुर क्षेत्र के नागवंशियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं । पंडितजी का कहना है की उन का इतिहास इस मंदिर से ही शुरू होता हैं। इस मंदिर पर स्थित नागमंदिर सबसे मशहूर हैं। हर सोमवार यहाँ आदिवासी नाग देवता की पूजा करने आते हैं, और यह परंपरा कई सदियों से चलती आ रही हैं 

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