Friday , 3 December 2021

इकलौता मंदिर जहां के भगवान अपनी मौसी के घर घूमने जाते हैं

जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा के बारे में आप सबने ज़रूर सुना होगा और आप में से कई वहां गए भी होंगे। आज ये यात्रा एक बार फिर पुरी में निकलेगी। जगन्नाथ पुरी ओडिशा में स्थित है। समुद्र किनारे बसा ये छोटा-सा शहर अपने धार्मिक वातावरण से हर तीर्थयात्री और टूरिस्ट का मन मोह लेता है। पुरी में आपको गली-गली में मंदिर मिल जाएंगे। और हर मंदिर में श्रद्धालु उसी तरह से पूजा-अर्चना करते दखाई देते हैं जिस तरह से जगन्नाथ मंदिर में। भारत में बसे 4 धामों में से एक जगन्नाथ पुरी को ऐसा धाम माना जाता है जहां जाकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। और यहीं से निकलती है ये यात्रा जो कि पूरी दुनिया में मशहूर है। इससे जुड़े कुछ बेहद रोचक तथ्य आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

1. जगन्नाथ पुरी इकलौता ऐसा मंदिर है जहां के तीनों ही भगवान भाई-बहन हैं। भगवान जगन्नाथ(श्री कृष्ण), बलभद्र(बलराम) और सुभद्रा।

2. दुनिया भर में केवल इसी तीर्थस्थल से मूर्तियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है।

3. इस यात्रा के  7 दिन पहले से मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं क्योंकि भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं। एक तरह से जगह में बदलाव लाने और तबीयत को ठीक करने के लिए उन्हें उनकी मौसी के घर भेजा जाता है। इन तीनों भाई-बहनों को गुण्डिचा घर मंदिर ले जाया जाता है।

4. हर वर्ष तीन नए रथों का निर्माण होता है जिनमें कि नई लकड़ियों और सामान का प्रयोग किया जाता है पर ये तीनों रथ पिछले साल के रथ के टू कॉपी होते हैं। मतलब सालों से ये रथ एक जैसे दिखते आ रहे हैं।

5. इन रथों के बकायदा नाम होते हैं… नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ) इसमें 18 पहिये लगे होते हैं और ये 45.6 फीट ऊंचा होता है। तलध्वज (भगवान बलभद्र) इसमें 16 पहिये होते हैं और ये करीब 45 फीट ऊंचा होता है। देवदालान (माता सुभद्रा) इसमें 14 पहिये लगे होते हैं और ये करीब 44.6 फीट लम्बा होता है।

6. कहते हैं मौसी के घर जाते समय भगवान बीच में आगे बढ़ने से इनकार कर देते हैं। ऐसे में बहुत ज़ोर लगाने पर ही इनका रथ आगे बढ़ता है।

7. पुरी में राजाओं के वंशज अभी भी रहते हैं। ऐसे में जब तक पुरी के राजा खुद आकर असली सोने की बनी झाडू से रास्ते को साफ़ नहीं करते तब तक भगवान मंदिर से बाहर नहीं निकलते।

8. 9 दिनों तक मौसी के घर में रहने के बाद जब भगवान को वापस लाया जाता है तो बीच में वो एक जगह रूककर अपनी फेवरेट मिठाई पोडा पीठा ज़रूर खाते हैं।

9. कहते हैं हर साल इस यात्रा के दिन पुरी में बारिश ज़रूर होती है।

10. इन सारी बातों के बावजूद लगभग हर साल इस यात्रा के दौरान भगदड़ मचने से कई लोगों की मौत हो जाती है

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