भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क (एमडीआर) लागू करना भारत के डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम की लंबे समय तक निरंतरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि इससे यूपीआई को देशभर में ग्राहकों और व्यवसायों के लिए आगे बढ़ने, नवाचार करने व सेवाएं देने में मदद मिलेगी।
रिजर्व बैंक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि ईकोसिस्टम में एमडीआर का उचित और सही बंटवारा तकनीक, बुनियादी ढांचे व स्वीकार्यता तंत्र में लगातार निवेश को बढ़ावा देगा।
इससे यूपीआई को व्यापक स्वीकार्यता, ग्राहकों की संख्या बढ़ाने और लेनदेन की मात्रा में लगातार बढ़ोतरी में मदद मिल सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी यूपीआइ लेनदेन (व्यक्ति-से-व्यक्ति एवं व्यक्ति-से-व्यापारी या मर्चेंट) यूजर्स के लिए मुफ्त रहेंगे और 2000 रुपये से कम के व्यक्ति से व्यापारी को लेनदेन व्यापारी के लिए भी मुफ्त बने रहेंगे।
केंद्रीय बैंक ने आश्वस्त किया, “रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि यूपीआई सुरक्षित, निर्बाध, सस्ता और सुलभ बना रहे। साथ ही भारत के विश्वस्तरीय डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम की लंबे समय तक निरंतरता और विकास को भी बढ़ावा दे।”
उल्लेखनीय है कि यूपीआई का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) करता है, जो रिजर्व बैंक व इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की पहल है। यह लोगों के बीच रियल-टाइम पेमेंट की सुविधा देता है और ग्राहकों को खरीदारी करते समय सीधे मर्चेंट को पेमेंट करने में मदद करता है।
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