कल्पना कीजिए, धरती पर एक ऐसी आंख तैयार हो रही है जो इंसानी आंख से अरबों गुना अधिक रोशनी जुटा सके और इतनी दूर तक देख सके, जहां आज के टेलीस्कोप भी सीमित पड़ जाते हैं।
चिली के अटाकामा रेगिस्तान में यूरोपीय सदर्न आब्जर्वेटरी (ईएसओ) ऐसा ही टेलीस्कोप तैयार कर रही है। इसका नाम है एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ईएलटी) और पूरा होने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा आप्टिकल/इन्फ्रारेड टेलीस्कोप होगा।
इसकी लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। ये प्रोजेक्ट 16 देशों की सहभागिता से चलाया जा रहा है और 2016 में इसकी नींव पड़ी थी। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, टेलीस्कोप का गुंबद करीब 80 मीटर यानी 260 फीट ऊंचा होगा।
इसके मुख्य लेंस का व्यास 39 मीटर यानी करीब 128 फीट होगा। यह दर्पण एक टुकड़े का नहीं, बल्कि 798 षट्कोणीय खंडों से मिलकर बनेगा। प्रत्येक खंड का वजन करीब 10 टन है। ईएसओ को उम्मीद है कि टेलीस्कोप 2030 के अंत तक विज्ञानी अवलोकनों के लिए तैयार हो जाएगा।
अत्यधिक कठोर मौसम वाले इलाके में टेलिस्कोपइतना विशाल टेलीस्कोप किसी शहर के आसपास नहीं, बल्कि अटाकामा के बेहद दूर-दराज इलाके में बनाया जा रहा है।
वजह कि अटाकामा दुनिया के सबसे शुष्क इलाकों में गिना जाता है। यहां आसमान बेहद साफ रहता है और वातावरण में नमी तथा बादलों की मात्रा बहुत कम होती है। बारिश भी कई साल में एक बार होती है। खगोल विज्ञान के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है।
पृथ्वी का वायुमंडल तारों से आने वाली रोशनी को थोड़ा-बहुत बिगाड़ देता है। वातावरण में नमी, धूल और हवा की हलचल जितनी कम होगी, टेलीस्कोप उतनी ही साफ तस्वीर हासिल कर सकेगा। लेकिन इंसानों के लिए यही जगह आसान नहीं है।
ऊंचाई, बेहद शुष्क हवा और तेज धूप के कारण यहां काम करने वालों को डिहाइड्रेशन और ऊंचाई से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यानी जिस जगह को इंसानों के लिए कठोर माना जाता है, वही जगह ब्रह्मांड को देखने के लिए लगभग आदर्श है।
विज्ञानियों को उम्मीद है कि ईएलटी हमारी आकाशगंगा के सबसे पुराने तारों का अध्ययन करने, उनके इतिहास और उम्र को बेहतर समझने तथा आकाशगंगा के केंद्र के आसपास तारों की गति पर नजर रखने में मदद करेगा।
इससे गुरुत्वाकर्षण और ब्रह्मांड की संरचना से जुड़े मौजूदा सिद्धांतों की भी अधिक सटीक जांच संभव हो सकती है।
ईएलटी की विशाल प्रकाश-संग्रह क्षमता विज्ञानियों को कुछ दूरस्थ ग्रहों के वातावरण का अधिक विस्तृत अध्ययन करने में मदद कर सकती है। अगर किसी ग्रह के वातावरण में ऐसे रासायनिक संकेत मिलें जो जैविक गतिविधि से जुड़े हो सकते हैं, तो वे जीवन की संभावित मौजूदगी की दिशा में महत्वपूर्ण सुराग दे सकते हैं।
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